उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की मेडिकल सप्लाई योजना को अपमान और राजनीति उकसावा बताया
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की मेडिकल सप्लाई योजना को अपमान और राजनीति उकसावा बताया
NewsPoint•
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की ओर से भेजी जाने वाली मेडिकल सप्लाई के खिलाफ कड़ा बयान दिया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने इसे "अपमान" और "राजनीतिक उकसावा" करार दिया। यह बयान गुरुवार को आया जब दक्षिण कोरियाई एकीकरण मंत्रालय ने प्योंगयांग के एक अस्पताल में 166 प्रकार की 1,431 मेडिकल चीजें भेजने की योजना का ऐलान किया। दक्षिण कोरिया ने इस सहायता के लिए यूएन सुरक्षा परिषद से कुछ छूट भी प्राप्त की थी।
किम यो-जोंग ने कहा कि यह कदम "शोर-शराबे वाली और भद्दी हरकत" है और इसे "एक और नाटक" बताया। उन्होंने कहा, "यह हमारे देश का अपमान है, हमारे खिलाफ राजनीतिक मकसद से किया गया उकसावा है और हमारे राष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।" इससे पहले भी उन्होंने इसी तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए दक्षिण कोरिया के एक आधिकारिक निष्कर्ष को खारिज किया था।किम ने यह भी कहा कि जब दक्षिण कोरिया के "घटिया नाटक" से कुछ लाभ नहीं होने वाला है, तो उन्होंने "मेडिकल उपकरण की मदद का सीन" जैसे नए नाटक का सहारा लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्योंगयांग का सोल के साथ किसी भी प्रकार का जुड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने दक्षिण कोरिया को उसके आधिकारिक नाम 'रिपब्लिक ऑफ कोरिया' (आरओके) से बुलाते हुए कहा, "हमारे पास आरओके के साथ आदान-प्रदान या साथ चलने के लिए कुछ भी नहीं है और न ही उसके आमने-सामने आने की कोई जरूरत है।"
किम ने आरओके के साथ रिश्तों में किसी सुधार की संभावना को बेकार बताया। उन्होंने कहा, "आरओके का असल रंग ढंग यही है, उसमें बदलाव की गुंजाइश नहीं और वो डीपीआरके का सबसे बड़ा दुश्मन है।" यहाँ डीपीआरके का मतलब 'डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया' है, जो उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम है।
आपसी रिश्तों में गिरावट के चलते, अंतर-कोरियाई बातचीत की स्थिति बहुत खराब है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि प्योंगयांग इस मेडिकल मदद को स्वीकार करेगा या नहीं। दक्षिण कोरिया के यूनिफिकेशन मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि मेडिकल सामान भेजने की संभावना कम है, और सरकार संयुक्त राष्ट्र से समय-सीमा बढ़ाने की मांग करेगी।
दक्षिण कोरिया की यह पहल मानवीय आधार पर की गई है, लेकिन उत्तर कोरिया का कड़ा रुख साफ करता है कि वह बातचीत और सहयोग से दूर है। खराब होते रिश्तों के चलते, किम का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि उत्तर कोरिया अपनी स्थिति से आसानी से समझौता करने को तैयार नहीं है।