भारतीय वायुसेना का 94वां वायुसेना दिवस: एपी सिंह ने किया ऐतिहासिक समारोह का आयोजन

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नई दिल्ली में 08 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना ने अपना 94वां वायुसेना दिवस मनाया। इस खास मौके पर गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना स्टेशन में एक भव्य परेड का आयोजन किया गया। वायुसेना प्रमुख एपी सिंह, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और कई पूर्व वायुसेना प्रमुखों ने इस समारोह में भाग लिया। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का पल है क्योंकि वे इस महीने अपनी कमान अपने उत्तराधिकारी को सौंपने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपने वायु योद्धाओं को हमेशा अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर गर्व करना चाहिए।

वायुसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में वायु योद्धाओं से कहा कि, "कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न आए, वह ऐसी कमजोर कड़ी नहीं बनेगा, जिससे वायुसेना रूपी श्रृंखला कमजोर हो या टूट जाए।" उन्होंने वायुसेना में आपसी सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि संगठन के हितों को हमेशा व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखना चाहिए। वायुसेना के हर कर्मी संगठन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है और उन्हें अपने कार्य का महत्व समझना चाहिए।
उन्होंने आत्मचिंतन की जरूरत पर बल दिया और कहा कि केवल आगे बढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ना भी जरूरी है। वायुसेना प्रमुख ने वायु योद्धाओं को याद दिलाया कि, "किसी भी परिस्थिति में वायुसेना का हित उनके निजी हितों से ऊपर होना चाहिए।" उन्होंने ‘स्वयं से पहले सेवा’ के सिद्धांत को वायुसेना की मूल भावना के रूप में रेखांकित किया। यह समझाना जरूरी है कि इस सिद्धांत का मतलब है कि पहले देश और संगठन की सेवा करनी चाहिए, फिर व्यक्तिगत इच्छाओं को देखना चाहिए।

इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख ने उन वायु योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा, "उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा।" उन्होंने वायुसेना के पूर्व योद्धाओं का भी सम्मान किया और कहा कि उनकी सोच और मेहनत ने वायुसेना की पहचान को ऊंचा किया है।

वायुसेना प्रमुख ने आने वाली पीढ़ियों पर विश्वास जताया कि वे वायुसेना को नए स्तर पर ले जाएंगी। उन्होंने देशवासियों से कहा कि वायुसेना का धर्म देश की सुरक्षा है और नागरिकों का प्रेम और सहयोग इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा, "वायुसेना उनके विश्वास पर खरा उतरने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।"

प्रमुख ने वायु योद्धाओं के परिवारों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके सहयोग और प्रोत्साहन से ही वायुसेना अपने काम को सही ढंग से करने में सक्षम होती है। उन्होंने वायुसेना दिवस पर आयोजित परेड की सराहना करते हुए सभी वायु योद्धाओं को बधाई दी। उन्होंने परेड कमांडर की भी प्रशंसा की और परेड की चाल, वेशभूषा, अनुशासन और उत्साह को उच्च स्तर का बताया।

वायुसेना प्रमुख ने पश्चिमी वायु कमान, वायु मुख्यालय, हिंडन वायुसेना स्टेशन और आयोजन में शामिल सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने थलसेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख, पूर्व वायुसेना प्रमुखों, मित्र देशों के प्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों का भी आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी वायु योद्धाओं से पुनः महान राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है और उसके मूल मंत्र ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ के आदर्शों को हमेशा बनाए रखना है। वायुसेना प्रमुख ने अपने संबोधन को ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ समाप्त किया, जो वायुसेना के प्रति देश के लोगों की भावना को व्यक्त करता है।

इस तरह, वायुसेना दिवस का यह आयोजन भारतीय वायुसेना के लिए गर्व और उत्साह का एक प्रतीक बना। यह अवसर वायु योद्धाओं, उनके परिवारों और देशवासियों के बीच एकता और समर्पण का संदेश देता है।