महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: महायुति और Mva गठबंधन में सीटों पर घमासान, नामांकन की स्थिति
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: महायुति और MVA गठबंधन में सीटों पर घमासान, नामांकन की स्थिति
NewsPoint•
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के लिए चुनावी संघर्ष तेज हो गया है। 23 अक्टूबर को होने वाले इस चुनाव में मुख्य मुकाबला महायुति और महाविकास अघाड़ी (MVA) के बीच होगा। लेकिन, चौंकाने वाली बात ये है कि दोनों गठबंधनों के भीतर भी सीटों को लेकर विवाद उठने लगे हैं। कई नेता, जो टिकट और सीट के बंटवारे से खुश नहीं हैं, उन्होंने गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ नामांकन किया है। इस स्थिति ने चुनावी माहौल को और भी रोमांचक बना दिया है।
महराष्ट्र विधान परिषद की कुल 78 सदस्य हैं, जिसमें से पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। ये सीटें हैं - पुणे स्नातक, पुणे शिक्षक, नागपुर स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक और अमरावती शिक्षक। मतदान 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। महायुति में बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं। सीटों के बंटवारे में यह देखा गया है कि पुणे की स्नातक और शिक्षक सीटें बीजेपी के पास गई हैं। बीजेपी ने यहां अपने उम्मीदवार उतारे हैं। लेकिन, पुणे शिक्षक सीट पर शिंदे गुट ने आपत्ति जताई है। शिवसेना ने मंगेश चिवटे को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया है, जबकि बीजेपी ने कौस्तुभ गावड़े को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस तरह से दोनों दल एक ही सीट पर आमने-सामने हैं।
बात करें नागपुर स्नातक सीट की, तो यहां भी बीजेपी को भीतर से चुनौती मिल रही है। पूर्व विधान परिषद सदस्य अनिल सोले ने बीजपी से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। इससे बीजेपी के लिए अपने असंतुष्ट नेताओं को साधना मुश्किल हो गया है।
विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में भी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यहां कांग्रेस, एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के बीच सीटों को लेकर समझौता नहीं हो रहा है। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस ने अदिति पोहरे को उम्मीदवार बनाया है, जबकि शिवसेना यूबीटी ने दत्तात्रेय लहाने को मैदान में उतार दिया है। इसी तरह, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर भी शिवसेना यूबीटी ने दिलीप घुगे को उम्मीदवार बनाया है, और एनसीपी ने भी यहां अपना उम्मीदवार उतारा है।
नोट करने वाली बात ये है कि उम्मीदवारों के पास नामांकन वापस लेने का समय 9 अक्टूबर तक है। इस समय सीमा के भीतर यह देखना जरूरी है कि क्या गठबंधन के वरिष्ठ नेता बागी उम्मीदवारों को मनाने में सफल होती हैं। शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने पहले ही इस बात का संकेत दिया है कि अगर गठबंधन के भीतर सहमति नहीं बनती, तो “फ्रेंडली फाइट” हो सकती है।
सच्चाई यही है कि महायुति और MVA को अपने-अपने बागियों को चुनावी मैदान से हटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। अगर हालात वैसी ही बने रहें, तो गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। 9 अक्टूबर के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद ही ये पता चलेगा कि कौन-कौन सी सीटें किस-किसकी होंगी।
इस चुनावी संग्राम में दोनों गठबंधनों के लिए अपनी स्थिति को मजबूती देने की चुनौती है। 23 अक्टूबर का चुनाव कई राजनीतिक समीकरणों की परख करने का अवसर बनेगा।