राजस्थान: दीपक बालियान को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की घटना पर सवाल उठाए गए हैं

NewsPoint•
Navbharat Times
राजस्थान के अलवर जिले के कठूमर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-प्रभारी दीपक बालियान को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह घटना 8 अक्टूबर की रात को हुई। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पार्टी नेताओं और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि दीपक को घर से जबरन ले जाया गया। साथ ही, यह भी कहा गया कि उनके साथ मारपीट की गई। यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले का है।

8 अक्टूबर की शाम करीब 8 बजे पुलिसकर्मी दीपक के घर पहुंचे। दीपक ने पुलिस की मौजूदगी का वीडियो सोशल मीडिया पर लाइव किया। कुछ समय बाद, पुलिसकर्मी फिर लौटे और रात करीब 10 बजे फिर से दीपक के घर पहुंचे। इस बार परिवार का कहना है कि पुलिस ने दीपक से वीडियो हटाने के लिए कहा। जब दीपक ने ऐसा करने से मना किया, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर परिवार और पार्टी का कहना है कि दीपक के पैर में पहले से फ्रैक्चर था, फिर भी उन्हें घसीटकर ले जाया गया। इस स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
दीपक के छोटे भाई अनिरुद्ध ने जब पुलिस कार्रवाई का वीडियो बनाना शुरू किया, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ भी मारपीट की। इससे पार्टी के नेता और परिवार के लोग पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाने लगे हैं। CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने इस मामले पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। वे वहां मौजूद थे जब पुलिस दीपक के घर पहुंची। उन्होंने इस दौरान पुलिस से सवाल किए और कहा, "गिरफ्तार करके दिखाओ, फिर देखना थाने में क्या होता है।"

CJP पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना बनाई है। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित मुद्दों पर आधारित है। पार्टी का कहना है कि इस प्रदर्शन से पहले कई कार्यकर्ताओं को विभिन्न जगहों पर हिरासत में लिया गया है।

इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना आवश्यक है। दीपक बालियान को हिरासत में लेने की कार्रवाई, उनके परिवार के आरोप और पुलिस की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए जानकारी जरूरी है। जरूरत होगी कि पुलिस की जांच के नतीजे सामने आएं, ताकि इस पूरे घटनाक्रम की सही तस्वीर सामने आ सके।

हालांकि दीपक का मामला और उनकी गिरफ्तारी काफी चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी नेताओं और उनके परिवार का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। सारे घटनाक्रम से साफ है कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पार्टी के नेताओं ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की है और चेतावनी दी है कि वे इस मामले को नहीं छोड़ेंगे।

समाज में इस प्रकार की घटनाएँ लोगों के अधिकारों और लोकतंत्र पर सवाल उठाती हैं। CJP की इस कार्रवाई से साफ है कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्यवाही को सहेजने का प्रयास कर रही है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कैसे प्रतिक्रिया देती है और आगे की कार्रवाई क्या होती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस और राजनीतिक पार्टी के बीच खींचतान को उजागर किया है। अधिकारों के हनन के प्रति सभी को सजग रहना होगा। इस मामले में न्याय की उम्मीद सभी कर रहे हैं।