नंदन नीलेकणि: भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक लीडर बनेगा
नंदन नीलेकणि: भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक लीडर बनेगा
NewsPoint•
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि भारत बड़े स्तर पर एआई को लोगों तक पहुंचाने और उसके उपयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय रहेगा। नीलेकणि ने यह भी कहा कि एआई सिर्फ जीपीटी मॉडल तक सीमित नहीं है और यह क्षेत्र किसी एक कंपनी के नियंत्रण में नहीं आएगा।
नीलेकणि ने स्पष्ट किया कि एआई का भविष्य सभी कंपनियों के लिए खुला है। उन्होंने कहा, "इस तकनीक को बोतल में बंद नहीं किया जा सकता।" इस क्षेत्र में और नवाचार देखने को मिलेंगे। अधिक चिप्स आएंगे और नई तकनीकें विकसित होंगी। यह "विनर टेक्स ऑल" क्षेत्र नहीं है, यानी एक ही कंपनी पूरे बाजार को नहीं संभालेगी। नीलेकणि ने भारत के डिजिटल तकनीकों के अनुभव की प्रशंसा की और कहा कि इस अनुभव के दम पर एआई के क्षेत्र में भी भारत को मदद मिलेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया और कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। उन्होंने बताया कि भारत का बैंकिंग सिस्टम कई देशों के मुकाबले मजबूत स्थिति में है। मोदी ने कहा, "यह मजबूती भारत की सॉवरेन रेटिंग में हुए सुधारों से झलकती है।" उनके अनुसार, भारत आज आत्मविश्वास के अभूतपूर्व स्तर पर है। देश में स्पष्ट नीतियों के साथ सुधारों को लागू किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत ने कोविड काल में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी विनिर्माण क्षमता का उपयोग करके अन्य देशों की मदद की। मोदी ने बताया कि हाल ही में भारत ने एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी की। इस सम्मेलन में केवल मानवता के लिए एआई के उपयोग पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि यह भी बताया गया कि एआई से पशुओं को किस प्रकार लाभ मिल सकता है।
प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि आज नवाचार के अवसर पहले से कहीं अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, "नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं और नए समाधान विकसित हो रहे हैं।" तथा 2014 के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता और सुलभ बनाने पर ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप, अब छोटे शहरों का छात्र डिजिटल शिक्षा हासिल कर सकता है। गांव का दुकानदार नए ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। युवा ऑनलाइन पाठ्यक्रमों से नए कौशल सीख सकते हैं।
मोदी ने यह भी कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी ने सिर्फ लोगों को जोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि उन्हें नए अवसरों से भी जोड़ा है। यही भारत के विकास मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि एआई की संभावनाएं असीमित हैं और इसे हर कोई अपने तरीके से उपयोग कर सकता है।
इस वैश्विक मंच पर नीलेकणि और मोदी दोनों ने भारत की तकनीकी वृद्धि और डिजिटल इकोसिस्टम की प्रशंसा की। यह स्पष्ट हो रहा है कि भारत का भविष्य तकनीकी क्षेत्र में और अधिक उज्ज्वल है। यह न केवल देश के लिए, बल्कि दुनिया के लिए भी सकारात्मक संकेत है। भारत तेजी से एक ऐसा राष्ट्र बनता जा रहा है, जहाँ तकनीक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इन तमाम बिंदुओं पर चर्चा करते हुए नंदन नीलेकणि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की क्षमताओं को और भी उजागर किया। हर कोई देख रहा है कि कैसे यह देश भविष्य की तकनीकी नवाचारों में अग्रणी बनेगा।