ओमप्रकाश राजभर ने सपा, बसपा के बीएलओ पर उठाए सवाल, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों का किया जिक्र

NewsPoint•
Navbharat Times
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में कई विषयों पर अपनी राय दी। उन्होंने सपा, बसपा और अन्य पार्टियों के बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर आरोप लगाया। राजभर ने कहा कि अगर मतदाता सूची में कोई गलती है, तो इसकी जिम्मेदारी उन बीएलओ पर है, जो चुनावी प्रक्रिया में लगे थे। उन्होंने सवाल किया, "अगर एसआईआर में कोई गलतियां हुई हैं तो चुनाव आयोग समय-समय पर उन्हें सुधारने के अवसर देता है। अगर कोई त्रुटि है तो जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जो बूथ पर गया और बूथ लेवल अधिकारी के रूप में काम किया। हर पार्टी ने अपने बूथ-स्तरीय प्रतिनिधि नियुक्त किए थे। सपा, बसपा या दूसरी पार्टियों के बीएलओ जो इस कार्य में लगे हुए थे, वे क्या देख रहे थे। इनके बीएलओ क्या सिर्फ सो रहे थे?"

कोलकाता की हालिया घटना पर भी राजभर ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए कहा, "यह घटना दुखद है, वहां के मुख्यमंत्री ने जो ऐलान किया है, वह पीड़ित परिवार को राहत देने का काम है।" उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा दी गई सहायता राशि की प्रशंसा की और इसे एक अच्छा कदम बताया।
रिजीम चेंज के बयान पर राजभर ने स्पष्ट किया कि "भारत और बांग्लादेश की तुलना संवैधानिक रूप से नहीं की जा सकती। भारत में ऐसा संभव नहीं है।" इसके अलावा, अभिजीत दिपके की जमानत और मार्च पर प्रतिबंध को लेकर उन्होंने कहा, "यह अदालत का मामला है।" जब मार्च पर प्रतिबंध की बात आई, तो उन्होंने कहा, "जहां अगर आपको अनुमति न हो, अगर वहां कार्यक्रम करेंगे, तो आप पर कार्रवाई नहीं होगी क्या।"

17 अक्टूबर को राजभर ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। वे उसी चुनाव आयोग के तहत सांसद बने, जिसकी वे अब आलोचना कर रहे हैं। अगर उनका दावा है कि गड़बड़ियां हो रही हैं और वोट चुराए जा रहे हैं, तो उन्हें भी इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वे भी इसी व्यवस्था के तहत चुनाव जीते थे। हालांकि, वे इस्तीफा देने की बात से पीछे हट रहे हैं।"

इस प्रकार, ओमप्रकाश राजभर ने कई मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए, जो राजनीतिक हलचलों का हिस्सा बने रहे।

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