इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस में प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निंदा की, सरकार प्रभावितों की मदद करेगी

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Navbharat Times
पेर िस, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। हाल ही में फ्रांस में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि जो लोग देश की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें अपने कार्यों का जवाब देना होगा। मैक्रों ने प्रदर्शन और हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए यह स्पष्ट किया कि हमें शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग करने वाले आम नागरिकों को उन उपद्रवियों से नहीं जोड़ना चाहिए जो तोड़फोड़ और लूटपाट कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने नुकसान पहुंचाया है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। जिन्होंने लूटपाट की है, उन्हें उसका हर्जाना भरना होगा।" मैक्रों ने हिंसा का शिकार हुए पुलिसकर्मियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को एक विशेष संकट प्रबंधन बैठक की अध्यक्षता करेंगे, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द मदद और सहायता मिल सके।
मैक्रों ने सुझाव दिया कि सरकार को हाल की घटनाओं से कुछ सबक लेना चाहिए। उन्हें खुफिया जानकारी और तैयारी की व्यवस्था की समीक्षा करने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। राष्ट्रपति ने छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं को भी समझा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों, नियोक्ता संगठनों और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी।

महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें प्रदर्शनों का एक बड़ा कारण बन रही हैं। मैक्रों ने कहा कि सरकार लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने और आर्थिक बोझ कम करने का पूरा प्रयास कर रही है। शनिवार को किए गए प्रदर्शनों में लगभग 5.5 लाख लोगों ने भाग लिया, जिनमें किसान, जलवायु कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन सदस्य और छात्र शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने ईंधन की कीमतों, बढ़ती महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाया।

हालांकि, कई स्थानों पर प्रदर्शन उग्र हो गए। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन घटनाओं के दौरान 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हिंसा में 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के सदस्य घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर बताई गई है।

सितंबर से, फ्रांस में छात्रों के कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें युवा बेहतर शिक्षा सुविधाओं और पढ़ाई की स्थितियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब फ्रांस में महंगाई, ईंधन की कीमतों और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का असंतोष बढ़ता जा रहा है।

इस प्रकार, यह हालिया घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि फ्रांस में सामाजिक और आर्थिक समस्याएं कितनी गंभीर हो चुकी हैं। प्रदर्शनों के पीछे की वजहें न केवल सामाजिक असमानता हैं, बल्कि आर्थिक परिस्थिति भी बड़ी भूमिका निभा रही है। उम्मीद है कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी और सुधार के प्रयास करेगी।

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