उत्तराखंड में बिजली दरें बढ़ेंगी? जनसुनवाई में उपभोक्ताओं की अनुपस्थिति से प्रस्ताव को मंजूरी की संभावना

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Navbharat Times
उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिनों में बिजली का बिल महंगा हो सकता है। राज्य में बिजली की दरों में करीब 3 रुपये प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की संभावना है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने बुधवार को इस संबंध में जनसुनवाई आयोजित की थी, लेकिन इसमें कोई भी उपभोक्ता या प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। इस अनुपस्थिति के कारण अब यह माना जा रहा है कि बिजली विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है, हालांकि अंतिम फैसला आयोग सभी पहलुओं की जांच के बाद ही लेगा।

बिजली विभाग ने आयोग के सामने बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। विभाग का कहना है कि बिजली खरीदने की लागत बढ़ गई है और अन्य आर्थिक कारण भी हैं, इसलिए टैरिफ में बदलाव जरूरी है। विभाग ने अलग-अलग तरह के उपभोक्ताओं, जैसे घरेलू, व्यावसायिक और अन्य, के लिए बिजली की दरें बढ़ाने की मांग की है। अगर आयोग इस प्रस्ताव को मान लेता है, तो इन सभी उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ जाएंगे।
आयोग ने उपभोक्ताओं को अपनी राय देने का मौका दिया था। इसके लिए बुधवार को जनसुनवाई रखी गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस जनसुनवाई में कोई भी उपभोक्ता, कोई संगठन या कोई जनप्रतिनिधि अपनी बात रखने नहीं पहुंचा। आमतौर पर, जब बिजली की दरें बढ़ाई जाती हैं, तो आयोग जनता की राय लेता है। उपभोक्ताओं की चिंताओं और सुझावों को ध्यान में रखकर ही आखिरी फैसला होता है। लेकिन इस बार जनसुनवाई में लोगों के न पहुंचने से ऐसा लग रहा है कि बिजली विभाग के प्रस्ताव को कोई बड़ी चुनौती नहीं मिलेगी।

अब आयोग बिजली विभाग के प्रस्ताव, उनके खर्चों और अन्य आर्थिक बातों की बारीकी से जांच करेगा। इसके बाद ही नई बिजली दरों के बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा। अगर आयोग बिजली विभाग की बात मान लेता है, तो उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को अपने बिलों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, यह बढ़ोतरी कितनी होगी, यह आयोग के अंतिम आदेश आने के बाद ही पता चलेगा।

बिजली की कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ती है। इसका असर सिर्फ घरों पर ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर भी पड़ेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें विद्युत नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं। आयोग के आदेश के बाद ही यह साफ होगा कि उत्तराखंड में बिजली कितनी महंगी होगी और यह नई दरें कब से लागू होंगी।

बिजली विभाग ने अपनी तरफ से यह तर्क दिया है कि बढ़ती लागत और बिजली खरीद के खर्चों को देखते हुए दरों में बदलाव करना आवश्यक है। विभाग का कहना है कि यह कदम उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए दरों में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि सभी पर एक जैसा बोझ न पड़े, लेकिन फिर भी बढ़ोतरी तो होगी ही।

यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब जनसुनवाई में लोगों की भागीदारी नगण्य होती है। इसका मतलब यह हो सकता है कि या तो लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं थी, या फिर उन्हें लगा कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे में, आयोग के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि आम जनता की असली चिंताएं क्या हैं।

विद्युत नियामक आयोग का काम ही यही है कि वह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करे और बिजली कंपनियों की मांगों का निष्पक्ष मूल्यांकन करे। लेकिन जब जनता खुद आगे आकर अपनी बात नहीं रखती, तो यह प्रक्रिया थोड़ी अधूरी रह जाती है। आयोग को अब विभाग के प्रस्तावों और अपने स्तर पर की गई जांच के आधार पर ही फैसला लेना होगा।

यह देखना दिलचस्प होगा कि आयोग किस तरह से इन सभी पहलुओं को संतुलित करता है। क्या वह उपभोक्ताओं की संभावित आर्थिक परेशानी को ध्यान में रखेगा, या फिर बिजली विभाग की वित्तीय जरूरतों को प्राथमिकता देगा। जो भी फैसला होगा, उसका सीधा असर राज्य के लाखों लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। इसलिए, आयोग का निर्णय बहुत सोच-समझकर लिया जाना चाहिए।

फिलहाल, उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को इंतजार है कि आयोग क्या फैसला सुनाता है। यह इंतजार जल्द ही खत्म होगा, और तब पता चलेगा कि आने वाले समय में बिजली का बिल कितना बढ़ने वाला है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे तौर पर हर घर को प्रभावित करता है, इसलिए इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।