जन्माष्टमी भोग: पैकेटबंद खाद्य सामग्री खरीदते समय एक्सपायरी डेट से छेड़छाड़ से ऐसे बचें

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Navbharat Times
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने की परंपरा है, लेकिन हाल ही में नवी मुंबई में एक्सपायरी डेट से छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद पैकेटबंद खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है। भक्त भगवान को अर्पित किए गए भोजन को प्रसाद के रूप में परिवार में बांटते हैं, इसलिए भोग के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री का ताजा, शुद्ध और सुरक्षित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में, जन्माष्टमी पर माखन, मिश्री, मेवे, पंजीरी या अन्य पैकेटबंद सामान खरीदते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि मैन्युफैक्चरिंग डेट, बेस्ट बिफोर और एक्सपायरी डेट की जांच करना, पैकेट की सील देखना और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी की पुष्टि करना। अगर किसी पैकेट पर तारीख से छेड़छाड़ का संदेह हो तो उसे इस्तेमाल करने से पहले उसकी तस्वीर, बैच नंबर, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और खरीद की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायत के लिए एफएसएसएआई के आधिकारिक शिकायत माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं में भगवान को चढ़ाए जाने वाले नैवेद्य में स्वच्छता और शुद्धता को बहुत महत्व दिया जाता है। यह भोग बाद में प्रसाद बनता है, जिसे बच्चे, बुजुर्ग और व्रत रखने वाले लोग भी खाते हैं। इसलिए, सिर्फ पैकेट की कीमत या उसकी आकर्षक पैकिंग देखकर सामान खरीदना काफी नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग डेट, बेस्ट बिफोर और एक्सपायरी डेट के साथ-साथ पैकेट की पूरी स्थिति की जांच करना बहुत जरूरी है। नवी मुंबई में जो मामला सामने आया, उसमें महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एक गोदाम पर छापा मारा था। वहां खाने-पीने के सामान के करीब 5,000 कार्टन मिले थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें चिप्स, स्नैक्स, नूडल्स, सूप, मेयोनीज और कोल्ड ड्रिंक जैसे कई उत्पाद थे। आरोप है कि कुछ उत्पादों पर पुरानी या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी तारीखों को केमिकल सॉल्वेंट से मिटाकर मशीन की मदद से नई तारीखें छापी जा रही थीं। कुछ पैकेट पर बदली हुई मैन्युफैक्चरिंग डेट और नए लेबल मिलने की भी जानकारी सामने आई। हालांकि, यह साबित नहीं हुआ है कि बदली हुई तारीख वाले यही पैकेट भारतीय बाजार में बेचे गए थे। साथ ही, किसी बड़े ब्रांड को इस कथित गड़बड़ी में शामिल बताना अभी उचित नहीं होगा।
पैकेट खरीदते समय इन 7 बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, तारीख के आसपास ध्यान से देखें। मैन्युफैक्चरिंग डेट या एक्सपायरी डेट के आसपास अगर खरोंच, धब्बे, मिटाई हुई स्याही या असामान्य प्रिंटिंग दिखाई दे तो ऐसा पैकेट खरीदने से बचें। दूसरी बात, दोहरी प्रिंटिंग दिखे तो सावधान रहें। अगर किसी तारीख के नीचे पुरानी प्रिंटिंग की हल्की परछाईं दिखाई दे या कोई अंक दो बार छपा नजर आए, तो दूसरा पैकेट लेना बेहतर है। तीसरी बात, स्याही और प्रिंटिंग की जांच करें। अगर एक्सपायरी डेट की प्रिंटिंग बाकी जानकारी से काफी अलग नजर आती है या स्याही असामान्य तरीके से फैली हुई है, तो उत्पाद की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकता है। चौथी बात, अतिरिक्त स्टिकर को ध्यान से देखें। हर अतिरिक्त स्टिकर फर्जी नहीं होता। कई उत्पादों पर नियमानुसार अतिरिक्त लेबल लगाए जा सकते हैं। लेकिन अगर कोई स्टिकर पुरानी जानकारी को छिपाता हुआ दिखे या निर्माता की जानकारी से मेल न खाए, तो सावधानी बरतें। पांचवी बात, पैकेट की सील जरूर जांचें। फूला हुआ पैकेट, टूटी सील, लीकेज या पैकेट के अंदर असामान्य हवा दिखाई दे तो उसे न खरीदें। सही तारीख होने के बावजूद ऐसे उत्पाद को इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। छठी बात, एफएसएसएआई और बैच नंबर देखें। पैकेट पर निर्माता का नाम, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, बैच या लॉट नंबर, एमआरपी और कस्टमर केयर की जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई होनी चाहिए। सातवी बात, खरीदारी का बिल जरूर लें। बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री खरीदते समय बिल लेना बहुत जरूरी है। अगर बाद में सामान को लेकर कोई शिकायत होती है तो बिल और पैकेट महत्वपूर्ण प्रमाण के तौर पर काम आ सकते हैं।

'बेस्ट बिफोर' और 'एक्सपायरी डेट' में अंतर समझना भी जरूरी है। 'बेस्ट बिफोर' आमतौर पर उस अवधि को बताता है, जिसके भीतर उत्पाद की गुणवत्ता, स्वाद और बनावट बेहतर रहने की उम्मीद होती है। यह गुणवत्ता की गारंटी है, सुरक्षा की नहीं। वहीं, 'एक्सपायरी डेट' या 'यूज़ बाय' उत्पाद के सुरक्षित इस्तेमाल की अंतिम समय-सीमा को दर्शाती है। खासकर जल्दी खराब होने वाली चीजों जैसे दूध, मावा, मेयोनीज और कुछ मिठाइयों के मामले में तारीख को लेकर बिल्कुल लापरवाही नहीं करनी चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ को सिर्फ उसकी गंध या रंग देखकर सुरक्षित मान लेना भी सही नहीं है, क्योंकि कुछ प्रकार की खराबी तुरंत दिखाई या महसूस नहीं होती।

भगवद्गीता के नौवें अध्याय के 26वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भक्त प्रेम और भक्ति से पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पित करे तो वे उसे स्वीकार करते हैं। इसका भाव यही है कि भगवान को भोग लगाने के लिए महंगी या बहुत सारी चीजों की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा से अर्पित किया गया ताजा और शुद्ध भोजन भी पर्याप्त माना जाता है। अगर बाजार से खरीदे गए मावे, पंजीरी या किसी पैकेटबंद खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर संदेह है, तो घर पर कम मात्रा में ताजा भोग तैयार करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। फल, मिश्री, घर का मक्खन या घर में तैयार पंजीरी जैसी चीजें भी भोग में शामिल की जा सकती हैं।

अगर आपको किसी पैकेट पर तारीख से छेड़छाड़ का संदेह हो तो उसे इस्तेमाल करने से पहले पैकेट, बैच नंबर, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और खरीद की रसीद की तस्वीर सुरक्षित रखें। दुकान का नाम और खरीद की तारीख भी नोट कर लेना उपयोगी रहेगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायत के लिए एफएसएसएआई के आधिकारिक शिकायत माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है। शिकायत करते समय उपलब्ध दस्तावेज और तस्वीरें सुरक्षित रखना मददगार रहेगा।

जन्माष्टमी पर भगवान को भोग लगाने के साथ-साथ प्रसाद ग्रहण करने वाले लोगों की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसलिए इस बार कान्हा के भोग के लिए सामान खरीदते समय चमकदार पैकेट से ज्यादा उसकी तारीख, सील और गुणवत्ता पर ध्यान दें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपका उत्सव सुरक्षित और आनंदमय रहे।

नवी मुंबई में सामने आए मामले ने यह साफ कर दिया है कि बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की एक्सपायरी डेट से छेड़छाड़ का खतरा बना हुआ है। यह घटना विशेष रूप से तब चिंताजनक हो जाती है जब हम जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर भगवान को भोग लगाने के लिए सामग्री खरीदते हैं। भोग का अर्थ है ईश्वर को अर्पित किया जाने वाला भोजन, और यह प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित होता है। इसलिए, इसकी शुद्धता और सुरक्षा सर्वोपरि है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में जो 5,000 कार्टन जब्त किए गए थे, उनमें चिप्स, स्नैक्स, नूडल्स, सूप, मेयोनीज और कोल्ड ड्रिंक जैसे उत्पाद शामिल थे। यह दर्शाता है कि यह समस्या किसी एक खास तरह के उत्पाद तक सीमित नहीं है। आरोप है कि पुरानी या एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुकी तारीखों को केमिकल सॉल्वेंट से मिटाकर नई तारीखें छापी जा रही थीं। यह एक गंभीर अपराध है जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता है।

जब आप कोई पैकेट खरीदते हैं, तो सबसे पहले मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट को ध्यान से देखें। अगर इन तारीखों के आसपास कोई खरोंच, धब्बे, मिटाई हुई स्याही या प्रिंटिंग में कोई गड़बड़ी दिखे, तो उस पैकेट को न खरीदें। कभी-कभी, पुरानी तारीख के ऊपर नई तारीख का स्टिकर लगा दिया जाता है। ऐसे में, अगर आपको किसी तारीख के नीचे पुरानी प्रिंटिंग की हल्की परछाईं दिखे या कोई अंक दो बार छपा नजर आए, तो वह पैकेट भी संदिग्ध हो सकता है।

प्रिंटिंग की गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। अगर एक्सपायरी डेट की प्रिंटिंग बाकी जानकारी से अलग दिखती है या स्याही अजीब तरह से फैली हुई है, तो यह उत्पाद की प्रामाणिकता पर सवाल उठाता है। अतिरिक्त स्टिकर के बारे में भी सतर्क रहें। हालांकि कुछ उत्पादों पर नियमानुसार अतिरिक्त लेबल लगाए जा सकते हैं, लेकिन अगर कोई स्टिकर पुरानी जानकारी को छिपा रहा है या निर्माता की जानकारी से मेल नहीं खा रहा है, तो सावधानी बरतें।

पैकेट की सील की जांच करना भी बहुत जरूरी है। अगर पैकेट फूला हुआ है, सील टूटी हुई है, कहीं से लीक हो रहा है या पैकेट के अंदर असामान्य हवा दिख रही है, तो उसे न खरीदें। ऐसी स्थिति में, भले ही तारीख सही हो, उत्पाद इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता।

हर पैकेट पर निर्माता का नाम, एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) लाइसेंस नंबर, बैच या लॉट नंबर, एमआरपी (Maximum Retail Price) और कस्टमर केयर की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है।

जब आप बड़ी मात्रा में सामान खरीदते हैं, तो हमेशा बिल लेना न भूलें। यह बिल और पैकेट बाद में किसी भी शिकायत या समस्या के मामले में महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर काम आ सकते हैं।

'बेस्ट बिफोर' और 'एक्सपायरी डेट' के बीच का अंतर समझना महत्वपूर्ण है। 'बेस्ट बिफोर' का मतलब है कि इस तारीख तक उत्पाद अपनी सर्वोत्तम गुणवत्ता में रहेगा। इसके बाद भी उत्पाद सुरक्षित हो सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता थोड़ी कम हो सकती है। वहीं, 'एक्सपायरी डेट' या 'यूज़ बाय' का मतलब है कि इस तारीख के बाद उत्पाद का सेवन करना सुरक्षित नहीं है। यह विशेष रूप से दूध, दही, पनीर, मेयोनीज और कुछ मिठाइयों जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि किसी खाद्य पदार्थ को केवल उसकी गंध या रंग देखकर सुरक्षित मानना पर्याप्त नहीं है। कुछ प्रकार की खराबी ऐसी होती है जो तुरंत दिखाई या महसूस नहीं होती। इसलिए, हमेशा तारीखों और पैकेट की स्थिति पर भरोसा करें।

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि वे भक्त के प्रेम और भक्ति से अर्पित किए गए पत्र, पुष्प, फल या जल को स्वीकार करते हैं। इसका अर्थ है कि भगवान को भोग लगाने के लिए महंगी या बहुत सारी चीजों की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा से अर्पित किया गया ताजा और शुद्ध भोजन ही पर्याप्त है। यदि आपको बाजार से खरीदे गए मावे, पंजीरी या किसी पैकेटबंद खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर संदेह है, तो घर पर ही थोड़ी मात्रा में ताजा भोग तैयार करना एक बेहतर विकल्प है। आप फल, मिश्री, घर का बना मक्खन या घर में तैयार पंजीरी जैसी चीजें भी भोग में शामिल कर सकते हैं।

यदि आपको किसी पैकेट पर तारीख से छेड़छाड़ का संदेह होता है, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले पैकेट की तस्वीर, बैच नंबर, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और खरीद की रसीद की तस्वीर जरूर लें। दुकान का नाम और खरीद की तारीख भी नोट कर लें। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए आप एफएसएसएआई के आधिकारिक शिकायत माध्यम का उपयोग कर सकते हैं। शिकायत करते समय आपके पास मौजूद सभी दस्तावेज और तस्वीरें बहुत मददगार साबित होंगी।

जन्माष्टमी पर भगवान को भोग लगाते समय, यह भी याद रखें कि यह प्रसाद उन लोगों द्वारा ग्रहण किया जाएगा जो आपके प्रियजन हैं। इसलिए, कान्हा के भोग के लिए सामान खरीदते समय, चमकदार पैकेटों के बजाय उसकी तारीख, सील और गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपका उत्सव न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हो, बल्कि सभी के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भी रहे। इस जन्माष्टमी पर, अपने भोग की शुद्धता और सुरक्षा को प्राथमिकता दें।