मार्को रुबियो की चेतावनी: ईरान को मदद करने वाले देशों पर लग सकते हैं अमेरिकी प्रतिबंध

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Navbharat Times
चैपल हिल (नॉर्थ कैरोलिना), 3 सितंबर: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कर दिया है कि जो भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करेगा, उसे भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने भारत और ईरान के बीच किसी नए व्यापार समझौते की अटकलों को भी सिरे से खारिज कर दिया। रुबियो ने 'द ब्रायन किल्मीड शो' को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, और इसके लिए आर्थिक दबाव के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान अपनी आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों में करता है, न कि अपने नागरिकों की भलाई के लिए।

रुबियो ने इस बात को स्वीकार किया कि दुनिया के कई देश ईरान के साथ संपर्क बनाए रखते हैं और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा, "हर देश अपनी विदेश नीति खुद बनाता है और दुनिया के कई देश ईरानी Government से बातचीत करते हैं। हमने भी कुछ चर्चाओं के दौरान ईरानी Government के प्रतिनिधियों से संपर्क किया है।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि President डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को प्रतिबंधों से बचने या उसके लिए राजस्व जुटाने के रास्ते बनाने में मदद नहीं करनी चाहिए। रुबियो ने चेतावनी दी, "अगर कोई देश ऐसा करने का फैसला करता है तो हमें उस पर भी प्रतिबंध लगाने पड़ सकते हैं।" उनका कहना था कि कोई भी देश ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद न करे और न ही ऐसे तंत्र बनाने में मदद करे जिनसे ईरान पैसा कमा सके, जिसका इस्तेमाल वह आतंकवाद को समर्थन देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों में कर सके।
ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। रुबियो ने कहा, "ईरान को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी, कम से कम तब तक तो बिल्कुल नहीं जब तक President ट्रंप पद पर हैं।" उन्होंने बताया कि ईरान पर दबाव बनाने का अमेरिका का मुख्य तरीका आर्थिक है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला है। रुबियो ने कहा कि जब तक ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करता रहेगा या ऐसा करने की इच्छा जताता रहेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। यह कीमत मुख्य रूप से आर्थिक होगी। उन्होंने आगे कहा, "जरूरत पड़ने पर हम सैन्य कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रखते हैं, ताकि न केवल अपनी सुरक्षा कर सकें बल्कि ईरान को दूसरे देशों के लिए खतरा बनने से भी रोक सकें।"

रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अपनी आर्थिक संसाधनों का उपयोग आम लोगों की भलाई के बजाय सशस्त्र समूहों को समर्थन देने में करता है। उन्होंने कहा, "उन्हें पैसे दो चीजों के लिए चाहिए होते हैं आतंकवाद को समर्थन देने के लिए और अंततः परमाणु हथियार हासिल करने के लिए। और हम ऐसा होने नहीं दे सकते।" उन्होंने यह भी बताया कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर हमले जारी रखे हुए है, जबकि अमेरिका ने जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया है। रुबियो ने जोर देकर कहा, "हम उन सभी चीजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे जो हमारी सेनाओं और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए तत्काल खतरा हैं। होर्मुज स् ट्रेट खुला रहेगा और उस पर ईरान का नियंत्रण नहीं होगा।"

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से राजनयिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में भी सहयोग कर रहा है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से ऐसे किसी भी व्यापारिक समझौते पर सवालिया निशान लग गया है जो प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद कर सकता हो। रुबियो के बयान से यह साफ है कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, और किसी भी देश को इसमें मदद करने पर वह सख्त कार्रवाई कर सकता है। यह स्थिति भारत के लिए एक नाजुक संतुलन बनाने की चुनौती पेश करती है, क्योंकि उसे अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच सामंजस्य बिठाना होगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताएं जगजाहिर हैं। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एक प्रमुख हिस्सा है। ईरान द्वारा क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने और आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों के चलते अमेरिका उस पर लगातार दबाव बनाए हुए है। रुबियो के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के समुद्री व्यापार में बाधा डालने वाले किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगा और ऐसे कृत्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि रुबियो का बयान केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के उन सभी देशों के लिए एक चेतावनी है जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान पर लगे प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करवाना चाहता है और इसके लिए वह किसी भी देश पर दबाव बनाने से पीछे नहीं हटेगा। यह वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, जहां देशों को अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का भी ध्यान रखना होगा। चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर भारत के सहयोग को देखते हुए, यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया देता है और अपने संबंधों को कैसे आगे बढ़ाता है।