ओडिशा में उर्वरक कालाबाजारी पर कार्रवाई: 11,600 से अधिक छापे, सैकड़ों डीलर दंडित

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भुवनेश्वर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026-27 सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अपनी कमर कस ली है। इस मुहिम के तहत राज्यभर में 11,600 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे गए हैं और सैकड़ों भ्रष्ट डीलरों पर सख्त कार्रवाई की गई है। उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, जिनके पास कृषि और किसान सशक्तिकरण मंत्रालय का भी जिम्मा है, ने उर्वरकों की कालाबाजारी और हेराफेरी के खिलाफ 'शून्य सहिष्णुता' की नीति अपनाई है। सरकार ने कालाबाजारी, जमाखोरी और घटिया उर्वरक बेचने जैसी गलत हरकतों को रोकने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रवर्तन दल बनाए हैं।

राजस्व, कृषि और पुलिस विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की टीमें और हवाई दस्ते फील्ड में सक्रिय हैं। आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव के निर्देश पर थोक और खुदरा उर्वरक दुकानों पर लगातार छापे मारे जा रहे हैं। जहां भी गड़बड़ी पाई जाती है, वहां उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
इस वित्तीय वर्ष में ओडिशा के विभिन्न जिलों में 11,684 उर्वरक दुकानों की जांच की गई है। इसके नतीजे में 2,774 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 321 डीलरों की उर्वरक बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। गलत तरीके अपनाने के आरोप में 170 डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 96 डीलरों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 दोषी डीलरों से उर्वरक का स्टॉक जब्त किया गया है और सात के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं।

पिछले साल, यानी 2025-26 में भी सरकार ने ऐसी ही कार्रवाई की थी। तब 9,017 उर्वरक दुकानों पर छापे मारे गए थे। 2,373 लोगों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए थे, 48 डीलरों की बिक्री रोकी गई थी और 53 डीलरों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए थे। गंभीर आरोपों के चलते 15 डीलरों से उर्वरक का स्टॉक जब्त किया गया था और नौ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि हर बिक्री केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार खरीफ सीजन में उर्वरकों की सप्लाई को ठीक से संभालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हालात पर पैनी नजर रखे हुए है। किसानों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत दुकानों से ही तय कीमतों पर उर्वरक खरीदें।

अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उर्वरक दुकानों पर हुई बड़ी छापेमारी और दोषी व्यापारियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई की जानकारी दी। यह कार्रवाई किसानों को सही दाम पर और समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के सरकार के वादे को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह कदम किसानों को राहत देने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी किसान को बीज और खाद की कमी का सामना न करना पड़े। इस तरह की सख्त कार्रवाई से भविष्य में कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगेगा।

सरकार ने यह भी बताया कि इस बार की कार्रवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा व्यापक है। ज्यादा दुकानों पर छापे मारे गए हैं और ज्यादा डीलरों पर कार्रवाई हुई है। यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है।

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसानों को सही समय पर सही मात्रा में उर्वरक मिलें, सरकार ने सप्लाई चेन को भी मजबूत किया है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से स्टॉक की जांच करें और किसी भी तरह की कमी को तुरंत दूर करें।

सरकार का लक्ष्य यह है कि खरीफ सीजन में किसी भी किसान को उर्वरक की कमी के कारण अपनी फसल को नुकसान न उठाना पड़े। इस दिशा में उठाए जा रहे कदम सराहनीय हैं और उम्मीद है कि इससे किसानों को काफी फायदा होगा।

किसानों को यह भी याद दिलाया गया है कि वे किसी भी डीलर से बिल लेना न भूलें। बिल लेने से किसी भी तरह की धोखाधड़ी की स्थिति में शिकायत करना आसान हो जाता है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह कार्रवाई न केवल भ्रष्ट डीलरों को सबक सिखाएगी, बल्कि अन्य डीलरों को भी सही तरीके से काम करने के लिए प्रेरित करेगी। सरकार का यह प्रयास कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने में मदद करेगा।

किसानों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के बारे में जानकारी रखें ताकि वे उनका पूरा लाभ उठा सकें। सरकार किसानों के लिए लगातार नई योजनाएं ला रही है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि उर्वरकों की कालाबाजारी न हो, सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जिस पर किसान अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इस नंबर पर शिकायत दर्ज कराने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का यह कदम किसानों के लिए एक बड़ी राहत है और यह दर्शाता है कि सरकार उनकी समस्याओं को समझती है और उन्हें हल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।