मल्लिकार्जुन खड़गे ने एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन को डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया

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2026
नई दिल्ली, 02 सितंबर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को नई दिल्ली में एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन को किसानों, कृषि और ग्रामीण समृद्धि के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिष्ठित डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया। यह सम्मान डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर डॉ. वाईएसआर और डॉ. केवीपी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया। इस अवसर पर तेलंगाना के Chief Minister रेवंत रेड्डी, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, तेलंगाना के उप Chief Minister मल्लू भट्टी विक्रमार्क, तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश गौड़, डी. श्रीधर बाबू, रघुवीरा रेड्डी, मीनाक्षी नटराजन और उत्तम रेड्डी सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उपस्थित रहे। खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुरस्कार गरीबों के प्रति संयुक्त आंध्र प्रदेश के पूर्व Chief Minister डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी के अटूट समर्पण और महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन के जनकल्याणकारी वैज्ञानिक दृष्टिकोण का एक अनूठा संगम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों का यह दृढ़ विश्वास था कि भारत की प्रगति तभी सच्ची मानी जा सकती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

खड़गे ने डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश में बेहद कठिन परिस्थितियों के दौरान कांग्रेस पार्टी को फिर से मजबूत किया था। मुख्यमंत्री बनने से पहले, वर्ष 2004 में, राजशेखर रेड्डी ने भीषण गर्मी में 1,400 किलोमीटर से अधिक की एक ऐतिहासिक पदयात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुना और समझा। सत्ता में आने के बाद, उन्होंने गरीबों के लिए ‘आरोग्यश्री’ योजना के माध्यम से मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। साथ ही, ‘इंदिरम्मा इंदलू’ योजना के तहत बेघर परिवारों को पक्के मकान दिए और किसानों को मुफ्त बिजली की सुविधा भी उपलब्ध कराई।
महान वैज्ञानिक और मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित डॉ. एमएस स्वामीनाथन के योगदान को याद करते हुए खड़गे ने कहा कि स्वामीनाथन को हरित क्रांति में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में भारत अकाल और खाद्यान्न की भारी कमी से जूझ रहा था। पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कृषि सुधारों की तकनीकी नींव रखी गई थी, जिसे पूर्व Prime Minister इंदिरा गांधी ने अपनी सरकार की मुख्य प्राथमिकता बनाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि हरित क्रांति के परिणामस्वरूप, 1960-61 से 1980-81 के दो दशकों में देश में चावल का उत्पादन 34.6 मिलियन टन से बढ़कर 53.6 मिलियन टन हो गया। वहीं, गेहूं का उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़कर 11 मिलियन टन से 36.3 मिलियन टन तक पहुंच गया।

खड़गे ने आगे कहा कि डॉ. स्वामीनाथन का मानना था कि ग्रामीण विकास केवल अधिक कृषि उत्पादन से कहीं बढ़कर है। यह ग्रामीण लोगों के जीवन की गुणवत्ता, सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी ‘सदाबहार क्रांति’ (एवरग्रीन रिवॉल्यूशन) की अवधारणा विज्ञान का उपयोग करके उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भूमि, जल, आजीविका और ग्रामीण समुदायों की गरिमा की रक्षा पर आधारित थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी बताया कि वर्तमान में डॉ. स्वामीनाथन की बेटियां, डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, डॉ. मधुरा स्वामीनाथन और प्रो. नित्या राव, उनके वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही हैं।

समारोह में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अनिश्चित मानसून, बाढ़ और सूखा अब केवल पर्यावरणीय मुद्दे नहीं रह गए हैं। ये समस्याएं किसानों की फसलों और उनकी आजीविका को छीनकर ग्रामीण परिवारों को कर्ज के जाल में फंसा रही हैं। उन्होंने कहा कि देश के ग्रामीण समुदायों को केवल चुनाव या आपदा के समय याद करने के बजाय, संकट आने से पहले ही सुरक्षा प्रदान करने वाले विकास मॉडल की तत्काल आवश्यकता है। खड़गे ने कांग्रेस के इतिहास को याद करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के भूमि सुधारों से लेकर राजीव गांधी के टेक्नोलॉजी मिशन, पंचायती राज के ऐतिहासिक सशक्तिकरण और सोनिया गांधी की देखरेख में यूपीए Government द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा ‘काम के बदले अनाज’ कार्यक्रम तक, कांग्रेस ने हमेशा ग्रामीण भारत के कल्याण को अपनी मुख्य नीति बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजशेखर रेड्डी की जनकल्याणकारी नीतियां और एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन का वैज्ञानिक कार्य इसी साझा सोच को साकार करते हैं।