भारतीय वायुसेना पोखरण में आयोजित करेगी 'ड्रोनाथॉन', स्वदेशी ड्रोन क्षमताओं का होगा प्रदर्शन

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 7 सितंबर। भारतीय वायुसेना राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में 14 से 16 सितंबर तक एक खास 'ड्रोनाथॉन' का आयोजन करने जा रही है। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश की स्वदेशी कंपनियां अपने बनाए हुए ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों की ताकत दिखाएंगी। 'ड्रोनाथॉन' का मुख्य मकसद वायुसेना को यह दिखाना है कि देश में विकसित ड्रोन तकनीक कितनी सक्षम है। इस कार्यक्रम में कई भारतीय कंपनियां अपने सबसे आधुनिक ड्रोन लेकर आएंगी। वायुसेना के अधिकारी इन ड्रोनों की क्षमताओं का सीधा प्रदर्शन देखेंगे। यह सिर्फ ड्रोन की बनावट या तकनीकी खूबियों को दिखाने का मौका नहीं होगा, बल्कि उनकी असली परिचालन क्षमता का भी प्रदर्शन किया जाएगा। यानी, पोखरण की विशाल फायरिंग रेंज में कंपनियां अपने ड्रोन उड़ाकर उनकी असली ताकत दिखाएंगी। वायुसेना के अधिकारी इन प्रणालियों के प्रदर्शन को करीब से देखेंगे और यह समझेंगे कि ये युद्ध में कितनी उपयोगी हो सकती हैं। माना जा रहा है कि इस आयोजन में लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन, एक साथ कई ड्रोन का झुंड (स्वॉर्म सिस्टम) और सामान ढोने वाले मानव रहित हवाई प्लेटफॉर्म खास आकर्षण का केंद्र होंगे।

यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय सेनाओं में ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। निगरानी रखने, खुफिया जानकारी जुटाने, सामान पहुंचाने, दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने और युद्ध अभियानों में ड्रोन का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में, भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ड्रोन के साथ-साथ उनके जरूरी पुर्जों और उप-प्रणालियों को देश में ही बनाने पर भी जोर दिया गया है। इनमें उड़ान नियंत्रक, सेंसर, संचार प्रणाली, नौवहन (नेविगेशन) और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल हैं। अब 'ड्रोनाथॉन' के जरिए पोखरण में स्वदेशी ड्रोन तकनीक को असली परिस्थितियों के करीब परखा जाएगा और वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से उनकी क्षमताएं जांची जाएंगी।
'ड्रोनाथॉन' का आयोजन भारतीय वायुसेना द्वारा किया जा रहा है। यह 14 से 16 सितंबर तक राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में होगा। इस आयोजन में देश की स्वदेशी कंपनियां अपने ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों का प्रदर्शन करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य वायुसेना को देश में विकसित ड्रोन तकनीक की वास्तविक क्षमताओं से अवगत कराना है। कंपनियां अपने अत्याधुनिक ड्रोन लेकर आएंगी और उनकी परिचालन क्षमता का लाइव प्रदर्शन करेंगी। वायुसेना के अधिकारी इन प्रणालियों की समीक्षा करेंगे और उनकी ऑपरेशनल उपयोगिता का आकलन करेंगे।

इस 'ड्रोनाथॉन' में लंबी दूरी तक काम करने वाले ड्रोन, ड्रोन के झुंड (स्वॉर्म प्रणालियों) और रसद (लॉजिस्टिक्स) से जुड़े मानव रहित हवाई प्लेटफॉर्म विशेष आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय सशस्त्र बलों में ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाना, रसद पहुंचाना, लक्ष्य की पहचान करना और युद्धक अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

हाल के दिनों में, भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ड्रोन के साथ-साथ उनके महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उप-प्रणालियों को देश में ही विकसित करने पर भी जोर बढ़ा है। इनमें उड़ान नियंत्रक, सेंसर, संचार प्रणाली, नौवहन (नेविगेशन) और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल हैं। 'ड्रोनाथॉन' के माध्यम से पोखरण में स्वदेशी ड्रोन तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों के करीब परखने और वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप उनकी क्षमता देखने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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