यमन में हूती हमलों से संघर्ष फैलने का खतरा, यूएन दूत ने जताई चिंता
यमन में हूती हमलों से संघर्ष फैलने का खतरा, यूएन दूत ने जताई चिंता
NewsPoint•
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रंडबर्ग ने यमन में हूती लड़ाकों द्वारा हाल ही में विभिन्न मोर्चों पर किए गए हमलों को 'बेहद चिंताजनक घटनाक्रम' बताया है, जो संघर्ष को और भड़काने का खतरा पैदा कर रहे हैं। इन हमलों के कारण नागरिकों की मौतें, घायल होना, परिवारों का विस्थापन और नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंच रहा है। ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से तत्काल लड़ाई रोकने, संयम बरतने और मौजूदा संवाद के रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है, ताकि तनाव को कम किया जा सके और राजनीतिक समाधान की राह आसान हो सके। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यमन में हूती लड़ाकों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष कई इलाकों में फैल गया है, जिसमें उत्तरी अल-जौफ प्रांत और पश्चिमी ताइज प्रांत में बड़े सैन्य अभियान शामिल हैं।
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेष दूत हंस ग्रंडबर्ग ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक् स’ पर जारी एक बयान में कहा कि यमन में हूती लड़ाकों की ओर से हाल के दिनों में कई मोर्चों पर किए गए हमले 'बेहद चिंताजनक घटनाक्रम' हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ये हमले संघर्ष को और ज्यादा फैलाने का खतरा पैदा कर रहे हैं। ग्रंडबर्ग ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि आम नागरिकों के मारे जाने और घायल होने, परिवारों के विस्थापित होने और नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर बड़े पैमाने पर लगातार लड़ाई फिर से शुरू होती है, तो इसका नागरिकों पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह पहले से ही मुश्किल राजनीतिक समाधान तक पहुंचने के रास्ते को और भी कठिन बना देगा।ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से अपील की कि वे हर तरह की लड़ाई और हिंसा को तुरंत रोकें। उन्होंने सभी से अधिकतम संयम बरतने और तनाव बढ़ने से रोकने के लिए मौजूदा संवाद के रास्तों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। इसमें संयुक्त राष्ट्र की मिलिट्री कोऑर्डिनेशन कमेटी भी शामिल है। स िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि वह मौजूदा तनाव को नियंत्रित करने और बातचीत के लिए जगह बनाए रखने के उद्देश्य से सभी पक्षों के साथ सीधे संपर्क में बने रहेंगे। इसके अलावा, उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय देशों से भी अपील की कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल हालात को शांत करने के लिए करें।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यमन में हूती लड़ाकों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष कई इलाकों में फैल गया है। सोमवार को सरकारी बलों ने उत्तरी अल-जौफ प्रांत में एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। वहीं, हूती लड़ाके पश्चिमी ताइज प्रांत को Government के नियंत्रण वाले लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़कों को काटने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, वे रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर भी बढ़ रहे हैं।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि बख्तरबंद वाहनों के समर्थन से सरकारी बलों ने अल-जौफ प्रांत की राजधानी अल-हज्म के पूर्व में स्थित हूती नियंत्रण वाले अल-लबानात सैन्य अड्डे की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि लड़ाई जारी रहने के बीच सरकारी बल इस ठिकाने को चारों तरफ से घेर रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, जमीनी अभियान से पहले पिछले 48 घंटों के दौरान इस सैन्य अड्डे पर कई हवाई हमले किए गए थे। इन हमलों में हूती संगठन का कमांड और कंट्रोल सेंटर तथा हथियारों के भंडार नष्ट कर दिए गए, जिससे वहां उनकी रक्षा क्षमता कमजोर पड़ गई।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हूती लड़ाकों को मजबूर करना है कि वे दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत और उसके पड़ोसी लाल सागर तट वाले होदेइदा प्रांत से अपने कुछ लड़ाकों को हटाएं। इन दोनों इलाकों में पिछले चार दिनों से भीषण लड़ाई चल रही है, जिसमें दोनों पक्षों के कम से कम 117 लड़ाके मारे जा चुके हैं।
यमन साल 2014 के अंत से संघर्ष की चपेट में है। उस समय हूती लड़ाकों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी Government के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हस्तक्षेप किया था। यह संघर्ष यमन को एक गंभीर मानवीय संकट में धकेल चुका है, जहां लाखों लोग भुखमरी और बीमारियों का सामना कर रहे हैं।