तमिलनाडु जहरीली शराब त्रासदी: एक सदस्यीय आयोग की अंतिम रिपोर्ट आज विधानसभा में पेश होगी

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Navbharat Times
चेन्नई, 8 सितंबर: तमिलनाडु सरकार मंगलवार को विधानसभा में कल्लाकुरिची जहरीली शराब त्रासदी की जांच करने वाले एक सदस्यीय आयोग की अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी। यह रिपोर्ट राज्य की सबसे घातक घटनाओं में से एक के कारणों, प्रवर्तन एजेंसियों की खामियों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर प्रकाश डालेगी। मद्रास हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज बी गोकुलदास की अध्यक्षता वाले इस आयोग का गठन पिछली डीएमके सरकार ने 19 और 20 जून 2024 को हुई मौतों के बाद किया था। आयोग को त्रासदी के पीछे के हालात का पता लगाने, एनफोर्समेंट एजेंसियों की कमियों की जांच करने और अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को रोकने के उपाय सुझाने का काम सौंपा गया था।

टीवीके सरकार द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली इस रिपोर्ट में औद्योगिक मेथनॉल की आपूर्ति श्रृंखला का विस्तृत विवरण होने की उम्मीद है। यह बताएगा कि कैसे यह जहरीला पदार्थ अवैध शराब बनाने वालों तक पहुंचा, उन्होंने इसे कैसे तैयार किया और बांटा। साथ ही, पुलिस, राजस्व, निषेध और उत्पाद शुल्क अधिकारियों की प्रतिक्रिया का भी इसमें जिक्र होगा। रिपोर्ट में निगरानी को मजबूत करने, मेथनॉल की आवाजाही को नियंत्रित करने, अवैध शराब के नेटवर्क को खत्म करने और उन अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय करने के लिए सिफारिशें भी शामिल होंगी जिनकी लापरवाही से यह अवैध धंधा फलता-फूलता रहा।
यह भयानक त्रासदी कल्लाकुरिची के करुणापुरम और आसपास के इलाकों में तब हुई जब लोगों ने मेथनॉल से मिलाई गई अवैध शराब पी ली। इसके बाद पीड़ितों को उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आंखों की रोशनी कमजोर होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। आनन-फानन में आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाई गई। मरीजों का इलाज कल्लाकुरिची, सलेम, विलुपुरम और पुडुचेरी के अस्पतालों में किया गया। आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 67 तक पहुंच गई थी, जबकि 145 मरीज इलाज के बाद ठीक होकर घर लौट गए थे।

इस घटना के शिकार हुए ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के दिहाड़ी मजदूर थे। इस वजह से यह घटना एक बड़ा राजनीतिक और मानवीय संकट बन गई। सरकार ने हर पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने और त्रासदी में अनाथ हुए बच्चों के लिए सहायता की घोषणा की थी।

शुरुआत में, इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में इसे अपराध शाखा-सीआईडी को सौंप दिया गया। पहले चरण में, पुलिस ने चार कथित शराब विक्रेताओं को गिरफ्तार किया था। साथ ही, अधिकारियों ने लगभग 200 लीटर मेथनॉल मिली हुई शराब भी जब्त की थी। इसके बाद, जांचकर्ताओं ने रेड हिल्स के एक संदिग्ध मेथनॉल सप्लायर शिवकुमार को गिरफ्तार किया, जिसका पता चेन्नई के एमजीआर नगर में चला। जहरीली शराब की खरीद, परिवहन, तैयारी और वितरण के आरोप में अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया, जिससे गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 24 हो गई।

इस मामले में जिला कलेक्टर का तबादला कर दिया गया था। साथ ही, पुलिस और शराबबंदी लागू करने वाले कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। बाद में, नवंबर 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। आयोग की रिपोर्ट से इस त्रासदी की आगे की विधायी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने में मदद करेगी।

यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे अवैध शराब का कारोबार लोगों की जान से खिलवाड़ कर सकता है। मेथनॉल एक खतरनाक रसायन है जो अगर थोड़ी मात्रा में भी पी लिया जाए तो जानलेवा साबित हो सकता है। इस त्रासदी ने राज्य में अवैध शराब के कारोबार और उसे रोकने में सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने पीड़ितों के परिवारों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ उनके पुनर्वास के लिए भी कदम उठाए हैं। अनाथ हुए बच्चों की शिक्षा और परवरिश की जिम्मेदारी भी सरकार ने उठाई है। यह दिखाता है कि सरकार इस त्रासदी को कितनी गंभीरता से ले रही है।

इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में सिर्फ विक्रेता ही नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अन्य लोग भी शामिल हैं। इससे पता चलता है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है जिसे तोड़ने के लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। मेथनॉल जैसे खतरनाक रसायन की आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखना भी बहुत जरूरी है।

यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि प्रवर्तन एजेंसियों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को रोकने के लिए उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा। साथ ही, जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा रहे हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

आयोग की रिपोर्ट से यह भी उम्मीद है कि यह भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एक खाका तैयार करेगी। इसमें लोगों को जागरूक करने और अवैध शराब के खतरों के बारे में बताने के उपाय भी शामिल हो सकते हैं। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट तमिलनाडु में शराब से जुड़ी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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