महाराष्ट्र एफडीए ने जून-अगस्त 2026 में 2,902 निरीक्षण किए, 880 लाइसेंस रद्द

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मुंबई, 7 सितंबर: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने जून से अगस्त 2026 के बीच राज्य में दवा निर्माण और बिक्री पर अपनी पैनी नजर रखी है। इस दौरान 2,902 जगहों का निरीक्षण किया गया और नियमों का उल्लंघन करने वाले 880 लाइसेंसधारकों पर कार्रवाई हुई। एफडीए ने कुल 607 दवा निर्माण इकाइयों और 2,295 दवा बिक्री दुकानों की जांच की। गंभीर गड़बड़ियां मिलने पर 140 उत्पादन इकाइयों और 740 बिक्री दुकानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।

एफडीए ने इन तीन महीनों में 104 बार 'सर्च एंड सीजर' (तलाशी और जब्ती) अभियान चलाए। इन अभियानों में 11.41 करोड़ रुपये की नकली दवाएं और कॉस्मेटिक्स जब्त किए गए। इसके अलावा, 20 फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गईं और 21 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
जांच में एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और कॉस्मेटिक बनाने वाली फैक्ट्रियों में कई बड़ी खामियां पाई गईं। इनमें योग्य टेक्नीशियन का न होना, क्वालिटी चेक में लापरवाही, उत्पादन रिकॉर्ड और असल उत्पादन में अंतर, कर्मचारियों की मेडिकल रिपोर्ट का न होना, बैच रिकॉर्ड का अधूरा होना और घटिया क्वालिटी की दवाएं बनाना शामिल है। कुछ जगहों पर तो ऐसी चीजें भी बनाई जा रही थीं जिनके लिए उनके पास लाइसेंस ही नहीं था।

ब्लड बैंक और ब्लड स्टोरेज सेंटरों की जांच में भी कई कमियां मिलीं। यहां पंजीकृत रक्त संक्रमण अधिकारी मौजूद नहीं थे, रिकॉर्ड अपडेट नहीं थे, ब्लड बैग को ठीक से नहीं रखा जा रहा था, तापमान के नियमों का पालन नहीं हो रहा था, जैविक कचरे के निपटान के नियम नहीं माने जा रहे थे और जरूरी उपकरणों के कैलिब्रेशन (जांच) के रिकॉर्ड भी नहीं थे।

दवा की दुकानें भी जांच के दायरे में आईं। यहां बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के दवाएं बेची जा रही थीं। बिना बिल के दवाएं खरीदी और बेची जा रही थीं। डॉक्टर के पर्चे के बिना ही कुछ खास दवाएं बेची जा रही थीं। एक्सपायरी (समाप्त हो चुकी) दवाओं को अलग रखने में लापरवाही बरती जा रही थी और तापमान से खराब होने वाली दवाओं को गलत तरीके से स्टोर किया जा रहा था।

एफडीए ने बताया कि जिन संस्थानों ने गंभीर और बार-बार नियम तोड़े, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सुनवाई का मौका देने के बाद उनके लाइसेंस निलंबित या रद्द कर दिए गए। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार शिकायतों की संख्या में 557% की भारी बढ़ोतरी हुई है। शिकायतों की जांच में 378%, 'सर्च एंड सीजर' मामलों में 217% और जब्त किए गए सामान के मूल्य में 234% की वृद्धि हुई है। फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने के मामलों में भी काफी इजाफा हुआ है। यह दिखाता है कि एफडीए दवाइयों की गुणवत्ता और बिक्री पर पहले से कहीं ज्यादा सख्ती बरत रहा है।

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