जर्मनी में Cdu की करारी हार: मर्ज़ सरकार पर सवाल, Afd मजबूत
जर्मनी में CDU की करारी हार: मर्ज़ सरकार पर सवाल, AFD मजबूत
NewsPoint•
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) को सैक्सोनी-आनहाल्ट राज्य चुनाव में करारी हार मिली है। इस हार ने मर्ज की सरकार और उनके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) इस जीत से मजबूत हुई है, जबकि सीडीयू को सत्ता गंवानी पड़ी है। मर्ज ने इसे "दशकों में सबसे गंभीर चुनावी हार" बताया है और कहा है कि यह उन्हें और उनकी पार्टी को "गहराई से झकझोर दिया" है। उन्होंने पद छोड़ने की कोई संभावना नहीं जताई, बल्कि देश को फिर से राजनीतिक सफलता के रास्ते पर लाने की बात कही है।
यह हार जर्मनी की राजनीति में एक बड़ा झटका है। सैक्सोनी-आनहाल्ट में लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने ऐसी पार्टियों को वोट दिया जो देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देती हैं। चांसलर मर्ज ने स्वीकार किया कि यह कोई सामान्य चुनावी उतार-चढ़ाव नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने वाले दलों को इतना बड़ा समर्थन मिलना चिंताजनक है। मर्ज ने माना कि एएफडी के मजबूत प्रदर्शन के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के कारण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस संकट का प्रभावी जवाब देने के लिए मौजूदा स्थिति का दोबारा आकलन करना होगा।मर्ज ने अपनी सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए कहा कि आने वाले समय में सरकार को यह साबित करना होगा कि पिछले साल चुना गया राजनीतिक रास्ता सही था। उन्होंने माना कि जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए सरकार को अपने फैसलों और उनके पीछे की वजहों को बेहतर ढंग से समझाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जर्मनी को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, नौकरशाही कम करने और आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए और अधिक काम करने की जरूरत है।
सरकार में शामिल सीडीयू और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच मतभेदों के सवाल पर मर्ज ने स्वीकार किया कि दोनों गठबंधन सहयोगियों को आपस में “बात करने की जरूरत” है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक सरकारों का काम समझौते के आधार पर चलता है और शायद सरकार को इस बात को जनता के सामने बेहतर तरीके से समझाने की जरूरत है।
एएफडी की जीत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए मर्ज ने रूस की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम की खुशी “यहां से करीब 2,500 किलोमीटर पूर्व” में मनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि कुछ ताकतों ने इस तरह के परिणाम को बढ़ावा देने और उसे संभव बनाने की कोशिश की। हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश या संगठन का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा रूस की ओर माना जा रहा है।
सैक्सोनी-आनहाल्ट के निवर्तमान मुख्यमंत्री और सीडीयू नेता स्वेन शुल्जे ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के पास अब राज्य में सरकार चलाने का जनादेश नहीं है। उन्होंने कहा, “अब शासन का जनादेश एएफडी के पास है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे क्या होगा, इसका फैसला निर्वाचित प्रतिनिधियों को करना है। शुल्जे ने यह भी कहा कि उन्हें सीडीयू के किसी विधायक के एएफडी में शामिल होकर उसे बहुमत दिलाने की संभावना नजर नहीं आती। उन्होंने याद दिलाया कि एएफडी खुद पहले कह चुकी है कि वह दूसरी पार्टियों के साथ बातचीत नहीं करना चाहती।
जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के क्षेत्रीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी ने करीब 44% वोट हासिल करके ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह जीत सत्ताधारी पार्टी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। इस हार ने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मर्ज ने खुद स्वीकार किया कि यह उनकी पार्टी के लिए "वर्षों, बल्कि दशकों में सबसे गंभीर चुनावी हार" में से एक है। उन्होंने कहा कि यह नतीजा उन्हें और उनकी पार्टी को "गहराई से झकझोर दिया" है और सरकार इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती।
मर्ज के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर था। उनसे पूछा गया कि वे कब मानेंगे कि उनकी राजनीतिक रणनीति विफल हो रही है और वे चांसलर के रूप में आगे सेवा करने की स्थिति में नहीं हैं। हालांकि, चांसलर ने पद छोड़ने की किसी भी संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि देश को फिर से साझा राजनीतिक सफलता के रास्ते पर कैसे लाया जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हार मानना कोई विकल्प नहीं है।”
मर्ज ने कहा कि वे ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो हर दिन अपनी भावनाएं सार्वजनिक रूप से जाहिर करते रहें, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सरकार को आत्ममंथन करना होगा। उन्होंने अपनी सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए कहा कि आने वाले समय में सरकार को यह साबित करना होगा कि पिछले साल चुना गया राजनीतिक रास्ता सही था। उन्होंने माना कि जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए सरकार को अपने फैसलों और उनके पीछे की वजहों को बेहतर ढंग से समझाना होगा।
उन्होंने कहा कि जर्मनी को प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, नौकरशाही कम करने और आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए और अधिक काम करने की जरूरत है। हालांकि, सरकार में शामिल सीडीयू और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच मतभेदों के सवाल पर मर्ज ने स्वीकार किया कि दोनों गठबंधन सहयोगियों को आपस में “बात करने की जरूरत” है।
सैक्सोनी-आनहाल्ट में लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने ऐसी पार्टियों को वोट दिया, जो देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देती हैं। मर्ज ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने वाले दलों के प्रति इतना बड़ा समर्थन ऐसा परिणाम है, जिसे सामान्य चुनावी उतार-चढ़ाव मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि एएफडी के मजबूत प्रदर्शन के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के कारण हैं। उनके मुताबिक मौजूदा स्थिति का दोबारा आकलन करना जरूरी है ताकि सरकार इस संकट का प्रभावी जवाब दे सके।
मर्ज ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक सरकारों का काम समझौते के आधार पर चलता है और शायद सरकार को इस बात को जनता के सामने बेहतर तरीके से समझाने की जरूरत है। एएफडी की जीत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए मर्ज ने रूस की ओर भी संकेत किया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम की खुशी “यहां से करीब 2,500 किलोमीटर पूर्व” में मनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि कुछ ताकतों ने इस तरह के परिणाम को बढ़ावा देने और उसे संभव बनाने की कोशिश की। हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश या संगठन का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा रूस की ओर माना जा रहा है।
सैक्सोनी-आनहाल्ट के निवर्तमान मुख्यमंत्री और सीडीयू नेता स्वेन शुल्जे ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के पास अब राज्य में सरकार चलाने का जनादेश नहीं है। उन्होंने कहा, “अब शासन का जनादेश एएफडी के पास है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे क्या होगा, इसका फैसला निर्वाचित प्रतिनिधियों को करना है। शुल्जे ने यह भी कहा कि उन्हें सीडीयू के किसी विधायक के एएफडी में शामिल होकर उसे बहुमत दिलाने की संभावना नजर नहीं आती। उन्होंने याद दिलाया कि एएफडी खुद पहले कह चुकी है कि वह दूसरी पार्टियों के साथ बातचीत नहीं करना चाहती।
जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के क्षेत्रीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी ने करीब 44% वोट हासिल करके ऐतिहासिक जीत दर्ज की है और इसकी ये जीत सत्ताधारी पार्टी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। इस हार ने जर्मनी की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है और चांसलर मर्ज के नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती पेश की है।