सांप के काटने से मौतों पर NHRC सख्त, राज्यों को एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश

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नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सांप के काटने से होने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए देश भर में एंटी-स्नेक वेनम (सांप के जहर का तोड़) की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह कदम महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सांप के काटने से हुई मौतों के दो अलग-अलग मामलों पर संज्ञान लेते हुए उठाया है। आयोग की प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि दूर-दराज के इलाकों और जहां सांप काटने की घटनाएं ज्यादा होती हैं, वहां एंटी-स्नेक वेनम की कमी न हो। इससे पीड़ितों को तुरंत जान बचाने वाला इलाज मिल सके।

आयोग ने यह भी कहा है कि राज्यों को ऐसे इलाकों की पहचान करनी चाहिए जहां सांप काटने का खतरा ज्यादा है। इन इलाकों में सांप काटने की घटनाओं का रिकॉर्ड रखना होगा। साथ ही, इन जगहों पर स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाना होगा। आयोग ने खासकर आदिवासी और दूर-दराज के इलाकों में बने आश्रम शालाओं और छात्रावासों की सुरक्षा और सुविधाओं की जांच करने पर जोर दिया है। इन छात्रावासों में बच्चों के लिए पर्याप्त बिस्तर, वार्डन और स्टाफ, सोने की सुरक्षित व्यवस्था, कैंपस की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता तक तुरंत पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यह निर्देश दो गंभीर घटनाओं के बाद आए हैं। पहला मामला महाराष्ट्र के गढ़चिरौली का है, जहां एक आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना ने छात्रावास की सुविधाओं और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए थे। दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट का है, जहां सांप के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। आरोप है कि इलाज के लिए एंटी-स्नेक वेनम मिलने में देरी हुई।

आयोग ने इन मामलों में संबंधित अधिकारियों से तय समय के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। एनएचआरसी का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सांप के काटने जैसी घटनाओं में किसी की जान न जाए और पीड़ितों को समय पर सही इलाज मिले। आयोग का मानना है कि बेहतर व्यवस्था और जागरूकता से ऐसी मौतों को रोका जा सकता है।

सांप का काटना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, खासकर भारत जैसे देश में जहां सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। एंटी-स्नेक वेनम एक खास दवा है जो सांप के जहर के असर को खत्म करती है। यह दवा जितनी जल्दी दी जाए, मरीज के बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए, आयोग ने दूर-दराज के इलाकों में इसकी उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

आयोग ने छात्रावासों की सुरक्षा पर भी जोर दिया है क्योंकि ये अक्सर ऐसे इलाकों में होते हैं जहां जंगली जानवर और सांप पाए जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। एनएचआरसी की यह पहल देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और लोगों की जान बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने के लिए भी कह रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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