भारतीय कबड्डी खिलाड़ी बृजेंद्र सिंह चौधरी डोपिंग मामले में फंसे, एशियन बीच गेम्स में सिल्वर मेडल गंवाया
भारतीय कबड्डी खिलाड़ी बृजेंद्र सिंह चौधरी डोपिंग मामले में फंसे, एशियन बीच गेम्स में सिल्वर मेडल गंवाया
NewsPoint•
नई दिल्ली, 8 सितंबर: इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (आईटीए) ने भारतीय कबड्डी खिलाड़ी बृजेंद्र सिंह चौधरी पर डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई की है. सान्या में हुए छठे एशियन बीच गेम्स के दौरान बृजेंद्र का डोपिंग सैंपल पॉजिटिव पाया गया था. यह सैंपल 27 अप्रैल 2026 को प्रतियोगिता के समय लिया गया था. सैंपल में 'ब्रिंजोलैमाइड' नाम का प्रतिबंधित पदार्थ मिला, जो वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की लिस्ट में डाइयूरेटिक्स और मास्किंग एजेंट की श्रेणी में आता है. इस वजह से एशियन बीच गेम्स में बृजेंद्र के व्यक्तिगत नतीजों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जिसमें पुरुषों की कबड्डी में उनका दूसरा स्थान भी शामिल है.
आईटीए ने मंगलवार को यह जानकारी दी. बृजेंद्र चौधरी ने डोपिंग नियम तोड़ने और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (ओसीए) के नियमों के तहत लगे नतीजों को स्वीकार कर लिया है. इस कारण, सान्या गेम्स में उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन को रद्द कर दिया गया है. इसमें पुरुषों की बीच कबड्डी इवेंट में जीता गया सिल्वर मेडल भी शामिल है. बृजेंद्र चौधरी सान्या गेम्स में भारत की 6 सदस्यीय पुरुष कबड्डी टीम का हिस्सा थे. इस टीम में जितेंद्र यादव, यथार्थ देशवाल, नीरज, जय भगवान और भानु प्रताप तोमर भी शामिल थे.भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 50-27 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी. हालांकि, फाइनल मुकाबले में टीम ईरान से 44-31 से हार गई और गोल्ड मेडल जीतने से चूक गई. हाफ-टाइम तक भारत 11-23 से पीछे था और दूसरे हाफ में वापसी नहीं कर सका. यह एशियन बीच गेम्स में पुरुषों की बीच कबड्डी में भारत का लगातार दूसरा सिल्वर मेडल था. इससे पहले वाले एडिशन में भी टीम रनर-अप रही थी.
आईटीए ने ओसीए की ओर से लागू एंटी-डोपिंग नियमों के तहत यह कार्रवाई की है. अब इस मामले को इंटरनेशनल कबड्डी फेडरेशन को भेजा जाएगा. वे अपने नियमों के अनुसार आगे के नतीजों पर फैसला लेंगे. आईटीए ने बताया कि ओसीए के नजरिए से यह मामला सुलझ गया है. जिन पक्षों को अपील करने का अधिकार है, वे ओसीए के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट' (CAS) में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं.
इस बीच, एक अच्छी खबर यह भी है कि भारत की महिला कबड्डी टीम ने सान्या में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने फाइनल में श्रीलंका को 47-31 से हराकर गोल्ड मेडल जीता. इस जीत के साथ ही महिला कबड्डी में भारत का लगातार छठा एशियन बीच गेम्स खिताब जीतने का सिलसिला जारी रहा. यह जीत भारतीय महिला कबड्डी टीम के दबदबे को दिखाती है.
ब्रिंजोलैमाइड एक ऐसा पदार्थ है जो वाडा की प्रतिबंधित लिस्ट में 'स्पेसिफाइड सब्सटेंस' यानी खास पदार्थ के तौर पर वर्गीकृत है. यह डाइयूरेटिक्स और मास्किंग एजेंट की एस5 कैटेगरी में आता है. यह प्रतियोगिता के दौरान और उसके बाहर, दोनों समय प्रतिबंधित रहता है. डाइयूरेटिक्स शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने में मदद करते हैं, जिससे एथलीट का वजन कम हो सकता है. मास्किंग एजेंट का इस्तेमाल डोपिंग टेस्ट में पकड़े जाने से बचने के लिए किया जाता है.
यह मामला डोपिंग के प्रति कड़े नियमों और खिलाड़ियों की जिम्मेदारी को उजागर करता है. खेल में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एंटी-डोपिंग नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं. खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों के बारे में जागरूक रहना चाहिए और किसी भी सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए. बृजेंद्र सिंह चौधरी के मामले से यह साफ होता है कि डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.