भारत को एस-400 की शेष डिलीवरी तय समय पर मिलेगी, रूस ने किया स्पष्ट

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नई दिल्ली, 8 सितंबर: रूस ने भारत को एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी खेप तय समय पर पहुंचाने का भरोसा दिलाया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि यह अहम मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली में होने वाली मुलाकात में चर्चा का हिस्सा होगा। स्पुतनिक इंडिया की वर्चुअल मीडिया ब्रीफिंग में पेस्कोव ने कहा, "रूस अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम है और उन्हें पूरा करेगा। यह मुद्दा हमारे दोनों नेताओं के बीच बातचीत का हिस्सा है।"

भारत और रूस के बीच साल 2018 में 5.43 अरब डॉलर का सौदा हुआ था, जिसके तहत भारत पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। इन पांचों में से दो सिस्टम की डिलीवरी साल 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। इससे पहले, मार्च 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने भारतीय वायुसेना के लिए अतिरिक्त एस-400 लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम खरीदने की मंजूरी भी दे दी थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एस-400 सिस्टम हमारे महत्वपूर्ण इलाकों को दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई खतरों से बचाएगा।
पेस्कोव ने भारत-रूस रक्षा सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि रूस अपने आधुनिक सैन्य उपकरण भारत के साथ साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह सहयोग सिर्फ सामान खरीदने-बेचने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह संयुक्त उत्पादन तक पहुंच गया है। ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए पेस्कोव ने कहा कि अब समय आ गया है कि दोनों देश इस मिसाइल को और भी बेहतर बनाएं, इसमें नई खूबियां जोड़ें और इसे दुनिया भर के बाजार में और ज्यादा दमदार और प्रतिस्पर्धी बनाएं।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान सैन्य सहयोग एक बहुत ही महत्वपूर्ण चर्चा का विषय रहेगा। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस बारे में सारी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में कितना गहरा और भरोसेमंद रिश्ता है। एस-400 जैसे उन्नत रक्षा प्रणालियों की समय पर डिलीवरी भारत की सुरक्षा तैयारियों के लिए बहुत मायने रखती है। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है। रूस का यह बयान भारत के लिए राहत भरा है, क्योंकि एस-400 सिस्टम भारतीय वायुसेना की क्षमता को काफी बढ़ा देगा। यह सिस्टम दुश्मन के मिसाइलों और विमानों को हवा में ही मार गिराने में सक्षम है, जिससे देश की सुरक्षा और मजबूत होगी। भारत और रूस के बीच यह रक्षा साझेदारी सिर्फ हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक के आदान-प्रदान और संयुक्त उत्पादन तक फैली हुई है, जो भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।