विवेक अग्निहोत्री ने पत्नी पल्लवी जोशी की पहचान पर छपी खबर पर जताई नाराजगी, पितृसत्तात्मक पत्रकारिता पर उठाए सवाल
विवेक अग्निहोत्री ने पत्नी पल्लवी जोशी की पहचान पर छपी खबर पर जताई नाराजगी, पितृसत्तात्मक पत्रकारिता पर उठाए सवाल
NewsPoint•
फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपनी पत्नी और जानी-मानी अभिनेत्री पल्लवी जोशी को लेकर छपी एक खबर पर तीखी नाराजगी जताई है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के नए बोर्ड में पल्लवी जोशी सहित कई फिल्मी हस्तियों की नियुक्ति की खबर में, पल्लवी का परिचय उनकी फिल्मी उपलब्धियों के साथ-साथ 'फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की पत्नी' के तौर पर दिया गया था। इसी बात पर विवेक अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि दशकों से अपनी अलग पहचान बनाने वाली एक महिला को उसके पति के नाम से क्यों पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने इस तरह की पत्रकारिता को 'महिला विरोधी' और 'पितृसत्तात्मक' करार दिया।
हाल ही में केंद्र सरकार ने सीबीएफसी के 18 सदस्यीय नए बोर्ड का गठन किया है। इस बोर्ड में प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और सुनील शेट्टी जैसे कई जाने-माने चेहरे शामिल हैं। इस बोर्ड का कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक रहेगा। इसी नियुक्ति को लेकर एक खबर प्रकाशित हुई थी, जिसमें पल्लवी जोशी का परिचय देते हुए उन्हें विवेक अग्निहोत्री की पत्नी और ‘द कश्मीर फाइल्स’ की कलाकार एवं निर्माता के रूप में बताया गया था।इस खबर में पल्लवी जोशी के पति के रूप में विवेक अग्निहोत्री का नाम इस्तेमाल किए जाने पर निर्देशक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने संबंधित पोस्ट को शेयर करते हुए इस तरह की पत्रकारिता पर सवाल उठाया। विवेक अग्निहोत्री ने लिखा, "यह किस तरह की, तीसरे दर्जे की, दुर्भावनापूर्ण और महिला-विरोधी पत्रकारिता है?" उन्होंने आगे कहा कि पल्लवी जोशी चार बार की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री हैं। उन्होंने चार साल की उम्र में अभिनय शुरू कर दिया था और उस समय भारत के सबसे जाने-माने टीवी कलाकारों में से एक थीं, जब शायद इस लेख को लिखने वाले कई पत्रकारों का जन्म भी नहीं हुआ था।
विवेक अग्निहोत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब पल्लवी ने भारतीय नौसेना की महिलाओं पर केंद्रित ऐतिहासिक धारावाहिक ‘आरोहण’ का निर्माण किया था, तब उन्हें (विवेक को) प्रोडक्शन का 'प' भी नहीं पता था। उन्होंने कहा कि पल्लवी ने अपने काम के जरिए जितना महत्वपूर्ण सिनेमा रचा और निर्मित किया है, उतना शायद किसी भी वेबसाइट की तमाम रिपोर्टें मिलकर भी नहीं कर पाएंगी।
इसके बावजूद, जब एक सफल और आत्मनिर्भर महिला के बारे में लिखा जाता है, तो उसे मुख्य रूप से 'फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की पत्नी' के रूप में पेश किया जाता है। विवेक अग्निहोत्री ने इस पर हैरानी जताते हुए पूछा, "क्यों?… क्योंकि शायद अब भी आपको लगता है कि किसी महिला की अपनी उपलब्धियां उसकी पहचान तय करने के लिए काफी नहीं हैं।" उन्होंने इसे पितृसत्ता का असली तरीका बताया, जिसमें दशकों की अपनी स्वतंत्र उपलब्धियों वाली महिला की पहचान को उस पुरुष तक सीमित कर दिया जाता है, जिससे उसकी शादी हुई है।
विवेक अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि पल्लवी जोशी ने अपनी पहचान किसी से उधार नहीं ली है। उन्होंने चार दशकों के अभिनय, टेलीविजन, सिनेमा, निर्माण और अपने असाधारण काम के जरिए अपनी पहचान खुद बनाई है। उन्हें कभी भी औसत दर्जे से समझौता करने, किसी प्रभावशाली उपनाम के हिसाब से खुद को ढालने या पति के जरिए मान्यता हासिल करने की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि यदि कोई सफल, स्वतंत्र महिला को उसके अपने दम पर स्वीकार नहीं कर सकता और उसे उसके पति के जरिए ही परिभाषित करने को मजबूर महसूस करता है, तो शायद समस्या पल्लवी जोशी में नहीं है, बल्कि उनकी अपनी गहरी पितृसत्तात्मक सोच में है।
निर्देशक ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि कुछ वेबसाइटें चंद अतिरिक्त व्यूज के लिए ऐसी हेडलाइन को बढ़ावा दे रही हैं, उसका बचाव कर रही हैं या उसकी अनुमति दे रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात तभी पूरी मानी जा सकती है, जब अलग-अलग महिलाओं के मामले में भी एक जैसा नजरिया रखा जाए।
विवेक अग्निहोत्री ने एक बेहतर हेडलाइन का सुझाव भी दिया। उन्होंने लिखा कि हेडलाइन ऐसी भी हो सकती थी: "पल्लवी जोशी - तीन बार की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री, जिन्होंने श्याम बेनेगल की ‘द मेकिंग ऑफ द महात्मा’ में कस्तूरबा की भूमिका निभाई, सबसे सफल शोज के साथ भारतीय टेलीविजन में क्रांति ला दी, ‘द कश्मीर फाइल्स’ में यादगार नकारात्मक किरदार निभाया, मानवाधिकारों की आवाज उठाई, सार्थक सिनेमा का निर्माण किया और दो बच्चों की मां हैं, फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की पत्नी भी हैं।"
उन्होंने इस अंतर को समझाते हुए कहा, "फर्क दिखा? ये हेडलाइन बताती है कि वह कौन हैं। दूसरी हेडलाइन बताती है कि वह किसकी पत्नी हैं। यह फर्क पत्रकारिता नहीं है। यह पत्रकारिता के मुखौटे में छुपी पितृसत्ता है।"
विवेक अग्निहोत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पल्लवी जोशी एक स्वतंत्र और सफल हस्ती हैं, जिनकी अपनी एक अलग पहचान है। उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक भारतीय मनोरंजन उद्योग में काम किया है और कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं और टेलीविजन पर भी अपनी छाप छोड़ी है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ में उनके काम को भी सराहा गया है। इन सबके बावजूद, उन्हें केवल 'किसी की पत्नी' के रूप में पेश करना उनकी उपलब्धियों का अपमान है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की खबरें न केवल पल्लवी जोशी जैसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों के प्रति अनुचित हैं, बल्कि यह समाज में महिलाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाती हैं। यह दर्शाता है कि आज भी कई लोग महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय उनके रिश्तों के माध्यम से आंकते हैं। यह पितृसत्तात्मक सोच का एक स्पष्ट उदाहरण है, जो महिलाओं को उनके अपने दम पर आगे बढ़ने से रोकती है।
विवेक अग्निहोत्री ने उम्मीद जताई कि भविष्य में मीडिया इस तरह की गलती नहीं दोहराएगा और महिलाओं को उनकी अपनी पहचान और उपलब्धियों के आधार पर सम्मान देगा। उन्होंने कहा कि सच्ची पत्रकारिता का मतलब है हर व्यक्ति को उसके अपने गुणों के आधार पर पहचानना, न कि किसी और के रिश्ते के आधार पर। यह न केवल पल्लवी जोशी के लिए, बल्कि समाज की हर महिला के लिए महत्वपूर्ण है।