खोज ए ब्रज प्रोजेक्ट: ब्रज क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के अध्ययन के लिए एमओयू साइन
खोज-ए-ब्रज प्रोजेक्ट: ब्रज क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के अध्ययन के लिए एमओयू साइन
NewsPoint•
नई दिल्ली, 17 सितंबर: दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर 'मोहन भागवत' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। 'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य ब्रज क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व का गहराई से अध्ययन करना, उसे सुरक्षित रखना और उसका प्रचार-प्रसार करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत ब्रज इलाके के पुराने ग्रंथों, साहित्य और सांस्कृतिक धरोहरों पर शोध किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी को अपनी विरासत के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके।
भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए इस पहल की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, "यह बहुत अच्छा कार्यक्रम है। ऐसा जरूर होना चाहिए।" जोशी ने चिंता जताई कि हमारे देश में अभी भी कई महत्वपूर्ण संस्थानों के बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम देश की विरासत के बारे में बहुत कम जानते हैं।"जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि हमें अपने साहित्य और देश के लिए योगदान देने वाले महान लोगों के बारे में बहुत कम पता है। उन्होंने कहा, "हमारे देश में जो महापुरुष हुए हैं, उसके बारे में जानकारी कम है, लेकिन अगर ऐसे संस्थान आज काम करेंगे तो यह काम आगे बढ़ेगा और शोध भी आगे बढ़ेगा।" उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में इस तरह के ज्यादातर काम सरकारी नहीं, बल्कि संस्थाओं के माध्यम से होते हैं, जहाँ लोग योगदान करते हैं और शोधकर्ता अपना काम करते हैं।
वरिष्ठ नेता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों को समझने के लिए ब्रज क्षेत्र का अध्ययन बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि ब्रज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह साहित्य, संगीत और कला का भी एक बड़ा केंद्र रहा है। इसलिए, 'खोज-ए-ब्रज' जैसा प्रोजेक्ट इस अनमोल विरासत को बचाने में बहुत अहम भूमिका निभाएगा।
इस कार्यक्रम से पहले, मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन की बधाई दी थी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था, "चिरंजीवी भव: जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।"
इस कार्यक्रम में इतिहासकार, शोधार्थी और संस्कृति से जुड़े कई जाने-माने लोग शामिल हुए। आयोजकों ने बताया कि एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद जल्द ही ब्रज क्षेत्र में ज़मीनी स्तर पर शोध और दस्तावेज़ीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा, "जिस तरह से पीएम मोदी ने 25 साल जनसेवा और देश व राज्यों की सेवा में बिताए हैं, ऐसा लगता है जैसे कोई फरिश्ता काम कर रहा हो।" उन्होंने आगे कहा, "चाहे गरीबों का कल्याण हो, महिलाओं का उत्थान हो, बच्चों की चिंता हो, सड़कें हों या सुरक्षा... देश के प्रधानमंत्री... ऐसा नहीं लगता कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। ऐसा लगता है जैसे वह परिवार के कोई बड़े सदस्य हों, जो अपने घर-परिवार का ख्याल रखते हैं।"
'खोज-ए-ब्रज' प्रोजेक्ट का उद्देश्य ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को सामने लाना है। यह प्रोजेक्ट ब्रज क्षेत्र के प्राचीन ग्रंथों, साहित्य, कला और पुरातात्विक स्थलों पर गहन शोध करेगा। इसका मकसद नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत के महत्व से अवगत कराना है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से ब्रज की अनूठी पहचान को संरक्षित और संवर्धित किया जाएगा।
यह पहल ब्रज क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करती है, जो न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सदियों से कला, संगीत और साहित्य का केंद्र भी रहा है। 'खोज-ए-ब्रज' इस बहुआयामी विरासत को समझने और उसका दस्तावेजीकरण करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के सहयोग से, यह प्रोजेक्ट ब्रज की छिपी हुई कहानियों और ज्ञान को उजागर करेगा।
इस तरह के प्रोजेक्ट देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और उसे संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह लोगों को अपनी विरासत पर गर्व करने और उसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए सहेजने के लिए प्रेरित करता है। 'खोज-ए-ब्रज' इस दिशा में एक सराहनीय कदम है, जो ब्रज की अमूल्य धरोहर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगा।