अमेरिका का समर्थन: आईएमईसी को वैश्विक आर्थिक गलियारे के तहत शामिल किया गया
अमेरिका का समर्थन: आईएमईसी को वैश्विक आर्थिक गलियारे के तहत शामिल किया गया
NewsPoint•
अमेरिका ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) को लेकर अपना समर्थन एक बार फिर जताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन के बाद, अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे उन रणनीतिक आर्थिक गलियारों में शामिल किया है जिनका वे विश्व स्तर पर समर्थन कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को ईरान से जुड़े सुरक्षा जोखिमों से दूर करने की आवश्यकता है। यह बातें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में कहीं।
ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि मध्य पूर्व में कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों ने ऊर्जा की सप्लाई के लिए नए रास्तों की आवश्यकता को दर्शाया है। उन्होंने कहा, “मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ऐसे रास्तों से दूर करने की जरूरत है, जहां ईरान से जुड़े सुरक्षा जोखिम मौजूद हैं।” इसके साथ ही, उन्होंने IMEC के साथ-साथ अन्य ऊर्जा और पाइपलाइन विकल्पों का समर्थन किया। अमेरिका और अर्जेंटीना द्वारा जारी एक संयुक्त दस्तावेज में एंडीज-अटलांटिक कॉरिडोर का भी उल्लेख किया गया। यह परियोजना जी7 की पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट (PGII) का हिस्सा है।अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि IMEC, मध्य एशिया, काकेशस में ट्रांस-कैस्पियन ट्रेड रूट, उप-सहारा अफ्रीका में लोबिटो कॉरिडोर और फिलीपींस में लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर, सभी रणनीतिक आर्थिक गलियारे हैं। इससे यह साफ होता है कि अमेरिका गलियारों को केवल परिवहन और व्यापार की परियोजनाओं के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इन्हें निवेश और आर्थिक संपर्क को मजबूत करने के उपकरण के रूप में भी मान रहा है।
IMEC के प्रस्तावित गलियारे का मुख्य उद्देश्य India को अरब प्रायद्वीप के माध्यम से यूरोप से जोड़ना है। इसमें समुद्री और रेल संपर्क, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल है। IMEC को अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापार, ऊर्जा और डेटा के प्रवाह को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल माना है। अमेरिका का इस गलियारे को अन्य आर्थिक गलियारों के साथ एक ही सूची में रखना इसके व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
वाशिंगटन के अनुसार, इन गलियारों के जरिए महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है और निजी क्षेत्र के निवेश के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अफ्रीका का लोबिटो कॉरिडोर अंगोला के अटलांटिक तट से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और जाम्बिया तक संपर्क स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यहां रेलवे, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा नेटवर्क के माध्यम से संपर्क को मजबूत किया जाएगा।
इसी तरह, फिलीपींस का लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर भी बंदरगाहों, रेलवे, स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में PGII के तहत प्रमुख आर्थिक गलियारों में शुमार किया है।
ट्रांस-कैस्पियन ट्रेड रूट मध्य एशिया और काकेशस क्षेत्र को वैकल्पिक व्यापार मार्गों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। अमेरिकी नीति के तहत इसमें परिवहन बुनियादी ढांचे, सीमा पार व्यापार और लॉजिस्टिक संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
अमेरिका और अर्जेंटीना के ताज़ा दस्तावेज में एंडीज-अटलांटिक कॉरिडोर के लिए सरकारी वित्तीय और तकनीकी सहायता का भी जिक्र किया गया है। इसमें यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक और यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी जैसे संस्थानों के माध्यम से सहयोग पर बात की गई है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश और अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
India के लिए यह महत्वपूर्ण है कि IMEC को अमेरिकी रणनीति के तहत एक प्रमुख आर्थिक गलियारे के रूप में मान्यता दी गई है। ट्रंप द्वारा समर्थन और फिर विदेश विभाग द्वारा इसका उल्लेख यह दर्शाता है कि IMEC वाशिंगटन के रणनीतिक कनेक्टिविटी एजेंडे में एक अहम स्थान रखता है।
इस सारे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका विश्व में अपने आर्थिक नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में गंभीर है। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि वैश्विक व्यापार के प्रवाह को भी सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इस पहल के जरिए अमेरिकी कंपनियों को नए अवसर मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।