अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर आरोप, उद्धव ठाकरे ने दोबारा चुनाव की मांग की
अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर आरोप, उद्धव ठाकरे ने दोबारा चुनाव की मांग की
NewsPoint•
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग, उद्धव ठाकरे की चुनावी मांगें, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति, राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका और आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे मामले पर अपनी बात रखी। यह बयान 24 सितंबर को मुंबई में दिया गया। सावंत ने चुनाव आयोग के एसआईआर फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग का काम सत्ता पक्ष के दबाव में हो रहा है। उन्होंने कहा, "मैं पहले भी कह चुका हूं कि आयोग सत्ता का गुलाम है और उनसे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती।" ठाकरे ने इस मुद्दे पर पत्रकार परिषद में मांग की है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को जेल भेजा जाए।
सावंत ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि "चुनाव के दौरान आखिरी दो घंटों में 42 लाख लोगों के मतदान करने के सवाल उठाए गए थे।" इस पर उन्होंने कहा कि "अगर आयोग के पास मतदान केंद्रों पर भीड़ और मतदान की प्रक्रिया से संबंधित CCTV रिकॉर्ड था तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए था।" भाजपा के सांसद संबित पात्रा के चुनाव आयोग के समर्थन में सलाह देने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। सावंत ने पात्रा को सत्ता पक्ष का समर्थक बताया। उन्होंने कहा, "वह Prime Minister और गृह मंत्री की तरफ से वकालत करते हैं।" आगे उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान ईवीएम में आग लगने की घटना का जिक्र करते हुए पूछा, "इसकी जांच की मांग क्यों नहीं की गई?"महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए सावंत ने उद्धव ठाकरे की मांग को दोहराया कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव होना चाहिए। उन्होंने कहा, "जहां-जहां चुनाव हुए हैं, वहां दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए।" इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगला चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से होना चाहिए। महाराष्ट्र में सूखे और किसानों की स्थिति को गंभीर बताते हुए सावंत ने कहा कि वह खुद 28 और 29 तारीख को दौरे पर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी के विधायक और उपनेता भी किसानों के बीच जाकर रैलियां करेंगे। उनका उद्देश्य "Government की आंखें खोलना" है। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री भी अब खुद दौरे कर रहे हैं, लेकिन किसानों को मदद दिए जाने की जरूरत है।"
सावंत ने सरकार को एक समय सीमा दी है। उनका कहना है, "अगर 5 अक्टूबर तक किसानों को मदद नहीं मिली तो हमारी पार्टी सड़क पर उतरेगी।" राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर बात करते हुए सावंत ने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के देशभर में उनके प्रभाव वाले बयान पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता गलत कामों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।"
छात्रों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि "जंतर-मंतर से शुरू हुई छात्रों की आवाज अब देशभर में पहुंच रही है।" उन्हें विश्वास है कि इस आवाज की गूंज बढ़ेगी। आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे के मामले पर उन्होंने कहा कि वह इसे जाति के आधार पर चल रही चर्चा से अलग तरीके से देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में यह सामने आता है कि जाति के आधार पर किसी तरह का अत्याचार, अन्याय या अनाचार किया गया है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता केवल चुनाव आयोग या राजनीतिक मुद्दों तक ही सीमित नहीं है। किसानों की दुर्दशा, छात्रों का संघर्ष और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी उनकी नजर है। वे चाहते हैं कि इन सभी मुद्दों पर सही तरीके से चर्चा हो और समाधान निकाला जाए। उनका मानना है कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए हर मुद्दे पर समझदारी और पारदर्शिता जरूरी है।