जम्मू कश्मीर शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने टीईटी छूट प्रस्ताव पास होने पर प्रतिक्रिया दी
जम्मू-कश्मीर शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने टीईटी छूट प्रस्ताव पास होने पर प्रतिक्रिया दी
NewsPoint•
श्रीनगर में 24 सितंबर को जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू और डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने कई अहम मुद्दों पर बात की। उन्होंने टीईटी से छूट का प्रस्ताव, किताबों पर बैन और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हुए हंगामे पर चर्चा की। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि टीईटी परीक्षा देना सभी शिक्षकों के लिए जरूरी है, लेकिन यह उनके सम्मान का सवाल भी है।
सकीना इट्टू ने कहा कि "ऐसा नहीं है कि शिक्षक टीईटी नहीं दे सकते, लेकिन हमारे जो टीचर हैं यह उनकी डिग्निटी का सवाल है।" उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पूरे देश के शिक्षकों को टीईटी देना होगा, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने इस पर ध्यान देने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हमें सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए, और इसके बाद विधानसभा से एक प्रस्ताव पास करना था। सकीना इट्टू ने कहा, "इस टीईटी रेजोल्यूशन के बारे में जो आज हाउस से प्रस्ताव पास किया है, मैं समझती हूं ये एक बहुत बड़ी बात है।" वह उम्मीद करती हैं कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी। इससे शिक्षकों को मानसिक तनाव से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक हमारे बच्चों के भविष्य को shaped करते हैं।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में पुस्तकालयों से 4,700 से ज्यादा विवादित और राष्ट्र-विरोधी किताबें हटाईं। इस पर इट्टू ने कहा, "अगर कोई किताब बैन हो जाती है तो इसके लिए कमेटी के सदस्य ही जवाबदेह होंगे।"
डिप्टी सीएम सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि "जम्मू-कश्मीर और यहां के लोगों के हक और हित में Government जो बिल पास करेगी, हम उसके साथ हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर बिल की अपनी अहमियत होती है।
विपक्ष ने ईसीआई के ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसपर चौधरी ने कहा कि "यह आरोप एक ऐसे संस्थान पर लगा है, जिससे देश के लोगों का विश्वास जुड़ा है।" उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा में नियम न निभाए जाएं तो जनता का भरोसा टूटता है।
चौधरी ने यह भी कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) पर लगे आरोप गंभीर हैं। ईसीआई पर जो आरोप लगे हैं, वे किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि आयोग के दो सदस्यों द्वारा लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, "ईसीआई को इन बारे में खुलकर बताना चाहिए।" वो ये भी जानना चाहते हैं कि "हिंदुस्तान के लोकतंत्र में यह नौबत क्यों आई?" उनका कहना था कि चुनाव के दौरान अगर लोकतंत्र को खतरा होता है तो यह बहुत गंभीर विषय है।
इसके अलावा, उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाए, "हम भाजपा से सवाल करेंगे कि 15 लाख कहां है?" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा ने कहा था कि "चुनाव के बाद Government बनते ही वे राज्य का दर्जा बहाल कर देंगे।"
जम्मू-कश्मीर के लोगो के राजनैतिक हालात पर यह चर्चा आगे बढ़ी। इट्टू और चौधरी दोनों ने यह स्पष्ट किया कि सरकार टीचर्स के हक में फैसले लेगी और उनके हितों की रक्षा करेगी।
शिक्षा मंत्री ने टीईटी पर कहा कि यह न केवल एक परीक्षा है, बल्कि यह शिक्षकों की गरिमा और मान सम्मान का भी प्रश्न है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे पर जितना हो सके, समर्थन करेगी।
इस संबंध में कार्रवाई करने के बारें में उन्होंने कहा कि "अगर कुछ और करने की जरूरत होगी, वो भी हम करेंगे ताकि टीचर्स की डिग्निटी को कहीं पर खतरा न पहुंचे।"
यह पूरी चर्चा यह संकेत देती है कि जम्मू-कश्मीर की सरकार शिक्षाकर्मियों के प्रति संवेदनशील है और वे उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। अंततः, स्थिति को सुधारने की दिशा में ये कदम महत्वपूर्ण हैं।