26 सितंबर 2026 का पंचांग: शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चंद्रमा का प्रभाव

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26 2026
हिंदू धर्म में पंचांग का बहुत महत्व है। पंचांग हमेशा शुभ काम, यात्रा, निवेश और पूजा-पाठ से पहले देखा जाता है। यह हिंदू काल-गणना की विधि है जो सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है। 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 10:18 बजे तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा की शुरुआत होगी। इस दिन का सूर्योदय सुबह 6:20 बजे और सूर्यास्त शाम 5:15 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 6:00 बजे और चंद्रास्त सुबह 6:00 बजे होगा। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करना विशेष रूप से शुभ है। इसी दिन से पितृ पक्ष की शुरूआत भी हो रही है।

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। यह आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र है। यह सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा हैं, जो देवताओं और पितरों के प्रमुख हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी, परोपकारी और नेतृत्व की क्षमता से भरे रहते हैं।
इस दिन दोपहर 1:17 बजे तक गंड योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इसे 27 नित्य योगों में से 10वां योग माना गया है। इसे आमतौर पर एक अशुभ योग समझा जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा की गतिविधियों का योग 120 डिग्री 00 मिनट से 133 डिग्री 20 मिनट के बीच होता है, तब गंड योग बनता है। इसे अशुभ समझा जाता है, लेकिन इसमें जन्मे लोग निडर और दृढ़ निश्चयी होते हैं।

अभिजीत मुहूर्त इस दिन सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदाई समय माना जाता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त का समय होता है।

इसके अलावा, शनिवार को अमृतकाल तड़के 03:32 से 05:07 बजे तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल को बहुत शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यही कारण है कि नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय सबसे बेहतर है।

इस दिन राहुकाल सुबह 9:19 से 10:48 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल का समय नए या शुभ कार्य शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 समान भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट होता है। इसलिए इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। हालांकि, जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।

हिंदू धर्म में गुलिक काल भी महत्वपूर्ण है। यह सुबह 6:20 से 7:50 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। इस काल में किए गए कार्यों से नकारात्मक परिणाम आने की संभावना होती है। इसलिए इस काल में नए काम शुरू करने से बचना चाहिए। हालांकि, जो काम बार-बार करने हों, उन्हें इस काल में किया जा सकता है। जैसे कि बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना। इस समय को अच्छा माना जाता है।

यमगंड काल इस दिन दोपहर 1:47 से 3:17 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ होता है। इस समय स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से जुड़े समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसे नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान यात्रा पर भी नहीं निकलना चाहिए और पैसे के लेन-देन से भी बचना चाहिए।

सूर्य इस दिन कन्या राशि में स्थित होगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन और कामकाज पर विशेष रूप से पड़ता है। इसी प्रकार, चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। यह स्थिति व्यक्ति की भावनाओं और स्वभाव पर गहरा असर डालती है। चंद्रमा को मन का कारक माना गया है और मीन राशि जल तत्व की होती है, इससे व्यक्ति में संवेदनशीलता और भावुकता बढ़ जाती है।

इस दिन दिशाशूल पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जहां यात्रा करना अशुभ माना जाता है।

अतः 26 सितंबर के दिन विशेष ध्यान रखें और पंचांग का पूरी तरह से पालन करें, ताकि कोई भी शुभ कर्म बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सके। सभी शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है।