शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान ट्रंप का चौंकाने वाला बयान, ताइवान और अमेरिका चीन संबंधों पर असर
शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान ट्रंप का चौंकाने वाला बयान, ताइवान और अमेरिका-चीन संबंधों पर असर
NewsPoint•
वाशिंगटन, 28 सितंबर (आईएएनएस)। हाल ही में शी जिनपिंग की अमेरिकी यात्रा में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान ट्रंप-शी वार्ता के बाद एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है, जिसने ताइवान और अमेरिका-चीन संबंधों पर नई बहस शुरू कर दी है। अमेरिका में चीन के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति शी से पूछा था कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा। यह बातचीत कब और कैसे हुई, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने दूसरी देशों को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का उदाहरण देते हुए शी से यह सवाल किया। यह ऐसे समय पर हुआ है जब ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री एक संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है। अमेरिका ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के नए हथियार पैकेज को मंजूरी देने में देरी कर रहा है। ट्रंप ने इससे पहले इस पैकेज को चीन के साथ बातचीत में एक महत्वपूर्ण ‘नेगोशिएटिंग चिप’ बताया था। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और वहां की स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश का विरोध करता है। चीन ने अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री का लगातार विरोध किया है। समाचार एजेंसी सिंहुआ ने बताया कि ट्रंप-शी बैठक में भी शी ने ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने के लिए कहा था।
पर्ड्यू के बयान के बाद अमेरिकी प्रशासन ने स्थिति साफ करने की कोशिश की। व्हाइट हाउस ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अमेरिका की चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है। उनका कहना था कि चीन को हथियार बेचने की न तो कोई पेशकश है और न ही कोई योजना।
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू ताइवान की सुरक्षा है। ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची ने कहा है कि ताइवान स्ट्रेट में स्थिति गंभीर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि चीन लगातार अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर खर्च कर रहा है। चेन ने कहा, "ताइवान की रक्षा संबंधी जरूरतों को अमेरिका समझता है।"
अमेरिका और चीन के बीच पिछले सप्ताह वाशिंगटन में हुई ट्रंप-शी वार्ता काफी महत्वपूर्ण रही। इस वार्ता में व्यापार, तकनीक, एआई और ताइवान जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने बातचीत और कुछ क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने पर जोर दिया। लेकिन ताइवान और अमेरिकी हथियार नियंत्रण जैसे रणनीतिक मुद्दे अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
इस घटनाक्रम से पता चलता है कि अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते किस तरह के संकट में हैं। दोनों देशों के नेताओं के बीच सीधी बातचीत और आपसी सहयोग जरूरी है, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा। इसी बीच, ताइवान के लिए अमेरिका की रक्षा नीति और चीन के साथ संबंधों की जटिलता और भी बढ़ गई है।
इससे यह साफ है कि अमेरिका-चीन संबंधों में मजबूती लाने के लिए बहुत से मुद्दों पर विचार करने की आवश्यकता है। ताइवान का मसला अमेरिका और चीन के रिश्तों में एक बड़ा कांटा बना हुआ है, जिसे सुलझाने की जरूरत है।