अमेरिका ने भारत को विशिष्ट दवाओं पर जीरो टैरिफ की दी राहत, जानें लाभ और शर्तें
अमेरिका ने भारत को विशिष्ट दवाओं पर जीरो टैरिफ की दी राहत, जानें लाभ और शर्तें
NewsPoint•
अमेरिका ने भारत को कुछ खास फार्मा उत्पादों पर जीरो टैरिफ देने का फैसला किया है। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने 28 सितंबर को दी। भारत, जो कि दवाओं की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में से एक है, को यह छूट ऐसे समय में मिली है जब अमेरिका 29 सितंबर से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और संबंधित सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इन विशेष दवाओं और सामग्री की सूची में केवल वे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें पिछले अप्रैल में राष्ट्रपति द्वारा घोषित किया गया था।
इस छूट में ऑरफन ड्रग्स (दुर्लभ बीमारियों की दवाएं), न्यूक्लियर दवाएं, प्लाज़्मा-बेस्ड थेरेपी, फर्टिलिटी दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ चिकित्सा उत्पाद भी शामिल हैं जो केमिकल, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से संबंधित हैं। भारत के अलावा इस लिस्ट में कई अन्य देश जैसे अर्जेंटीना, बांग्लादेश, और जापान भी शामिल हैं।अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने बताया कि यह छूट उन देशों के लिए है जो अमेरिका के साथ मौजूदा या भविष्य के व्यापार और सुरक्षा पर आधारित समझौतों में शामिल हैं। यह विशेष छूट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रैल में घोषित नीति का हिस्सा है, जिसमें ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत नियमों में बदलाव किया गया है। इस नीति के तहत कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनकी सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।
इस नियम के तहत जो कंपनियां सूचीबद्ध हैं, उनके लिए नियम 31 जुलाई से लागू हो गए थे, जबकि अन्य कंपनियों के लिए यह 29 सितंबर से लागू होगा। वाणिज्य विभाग का कहना है कि जेनेरिक दवाओं पर यह टैरिफ लागू नहीं होगा। यह बात खासकर भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अमेरिका को भारत की फार्मा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का है।
भारतीय कंपनियां केवल जेनेरिक दवाएं नहीं, बल्कि पेटेंट वाली दवाएं, एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) और अन्य खास प्रकार की थेरेपी भी बनाती हैं। इस नए फैसले से भारतीय कंपनियों को महंगी और विशेष दवाओं के अमेरिकी बाजार में आने की कोई खास रुकावट नहीं होगी। इससे उन्हें बिना टैरिफ के अमेरिका में व्यापार करने का साफ मौका मिलेगा।
हालांकि, अमेरिका की एक नीति भी जारी है, जिसके अनुसार टैरिफ का इस्तेमाल कर कंपनियों को अपने देश में दवाओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारत जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है और अमेरिका के स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सप्लायर भी है। भारतीय कंपनियां एपीआई और तैयार दवाएं अमेरिका को निर्यात करती हैं, जिसका उपयोग वहां के अस्पतालों, फार्मेसियों और मरीजों के लिए होता है।
इस व्यापार का बढ़ता रिश्ता भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हालांकि, इस छूट के बावजूद अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। अमेरिका की योजना यह है कि वह अपने भीतर दवाओं का उत्पादन बढ़ाए, जिससे उसे स्वास्थ्य और सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
इसलिए, भारत को यह सीमित छूट सिर्फ कुछ खास स्वास्थ्य उत्पादों को ही टैरिफ से बचाती है। जबकि, अमेरिका की व्यापक नीति दवाओं के उत्पादन को अपने देश में बढ़ाने का ही लक्ष्य रखती है। यह सब तथ्य मिलाकर यह दिखाता है कि अमेरिका और भारत के बीच फार्मा व्यापार में कोई भी कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
यह निर्णय उन भारतीय कंपनियों के लिए भी एक नई संभावना लेकर आया है, जो स्वास्थ्य से संबंधित उत्पादों के व्यापार के लिए नए अवसरों की तलाश कर रही हैं। जबकि भारत की दवा उद्योग की महत्ता अमेरिका में बढ़ती जा रही है, भारत के लिए इसे बनाए रखना जरूरी है।
समूह में रहने का यह अवसर भारत के लिए एक अच्छी आर्थिक रणनीति बन सकता है, जिससे उसे दवा उत्पादन में और अधिक बल मिलेगा। भारत का दवा उत्पादक क्षेत्र इस नई नीति से लाभान्वित हो सकता है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सके और नई ऊंचाइयों तक पहुंच सके।