Us Pressure On Iran Trumps Plan To Block Ships Strict Stance On Nuclear Weapons
ईरान पर अमेरिकी दबाव: ट्रंप की जहाजों को ब्लॉक करने की योजना, परमाणु हथियार पर सख्त रुख
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को ब्लॉक करने की योजना की घोषणा की है। यह योजना कुछ ही घंटों में लागू हो जाएगी। अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। ट्रंप ने ईरान की मौजूदा खराब हालत का जिक्र किया है।
वॉशिंगटन, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की मौजूदा खराब हालत और हताशा का जिक्र करते हुए कहा कि ईरानी पोर्ट से आने-जाने वाले जहाजों को ब्लॉक करने की योजना कुछ ही घंटों में लागू कर दी जाएगी। मियामी से लौटने के बाद ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इलाके में सीजफायर अच्छी तरह से बना हुआ है, लेकिन सोमवार सुबह ब्लॉकेड से पहले वॉशिंगटन के रुख में कोई नरमी नहीं आने वाली। उन्होंने यह भी कहा कि कई नावें तेल भरने के लिए अमेरिका की ओर आ रही हैं और दूसरे देश ईरान की तेल बिक्री रोकने की कोशिशों में सहयोग कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने उन देशों का नाम नहीं बताया। ईरान के साथ संभावित बातचीत को लेकर ट्रंप का रुख सख्त रहा और उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ईरान बहुत खराब स्थिति में है, वे काफी हताश हैं। ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।” इन बयानों से साफ है कि अमेरिका, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच आर्थिक दबाव और समुद्री नीतियों के जरिए उसके ऊर्जा निर्यात को सीमित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
ट्रंप ने इस दौरान नाटो की भी आलोचना की और कहा कि गठबंधन ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा, “मैं नाटो से बहुत निराश हूं। हम इस पर खरबों डॉलर खर्च करते हैं, लेकिन वे हमारे साथ नहीं थे।” प्रस्तावित नाकाबंदी को ईरान पर दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, खासकर उसके तेल निर्यात को निशाना बनाकर, जो तेहरान की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है।मीडिया आउटलेट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान की स्थिति पर फिर से जोर देते हुए कहा, “मुझे लगता है कि ईरान की हालत बहुत खराब है। वे बहुत हताश हैं। ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं होगा।” उन्होंने अमेरिका की सैन्य ताकत का भी बखान किया और कहा, “हमारे पास सबसे बढ़िया मिलिट्री इक्विपमेंट हैं। हमारे पास सबसे बढ़िया लोग हैं। हमारे पास दुनिया की अब तक की सबसे मजबूत सेना है और हर कोई इसे देखता है, चाहे वह वेनेजुएला हो या हमने ईरान के साथ जो किया है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को खत्म करने की अपनी क्षमता पर भी बात की। उन्होंने कहा, "मैं एक दिन में ईरान को खत्म कर सकता हूं। मैं एक घंटे में उसे खत्म कर सकता हूं। मैं उनकी पूरी एनर्जी, सब कुछ, उनके हर प्लांट, उनके बिजली बनाने वाले प्लांट ले सकता हूं, जो बहुत बड़ी बात है।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा करने से नफरत है, क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो ईरान को फिर से बनाने में 10 साल लग जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि वे इसे कभी दोबारा नहीं बना पाएंगे। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान को दिखाने के लिए एक पुल हटा दिया था, क्योंकि उन्होंने एक ऐसा बयान दिया था जो सच नहीं था। उन्होंने कहा, "मैंने कहा, मैं एक पुल हटाने जा रहा हूं और हटा दिया।"
ट्रंप ने ईरान के हमले को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि एक दिन ईरान ने उनके एक खास एसेट, यानी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन पर हमला किया था। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने 101 मिसाइलें दागी थीं, जो दो हजार मील प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से जा रही थीं। उन्होंने कहा कि थोड़े ही समय में अमेरिका ने सभी मिसाइलों को मार गिराया और आज उनके टुकड़े समुद्र की तलहटी में पड़े हैं।
जब उनसे पूछा गया कि वे ईरान के बातचीत के लिए लौटने का कितने समय तक इंतजार करेंगे, तो उन्होंने बेफिक्री से जवाब दिया, “मुझे फर्क नहीं पड़ता कि वे वापस आते हैं या नहीं। अगर नहीं आते, तो भी मैं ठीक हूं।”
यह सब बातें अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती हैं। अमेरिका ईरान पर आर्थिक और समुद्री नीतियों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि वह अपने ऊर्जा निर्यात को सीमित करे। ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए तेल निर्यात बहुत महत्वपूर्ण है, और इस पर रोक लगाने से तेहरान पर काफी दबाव पड़ेगा।
ट्रंप का नाटो पर बयान भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नाटो ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जबकि अमेरिका इस गठबंधन पर बहुत पैसा खर्च करता है। यह दिखाता है कि ट्रंप अमेरिका के सहयोगियों से भी खुश नहीं हैं और वे चाहते हैं कि दूसरे देश भी अमेरिका के हितों का ध्यान रखें।
ईरान के साथ बातचीत को लेकर ट्रंप का रुख बहुत सख्त है। वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहते हैं और इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहे हैं। हालांकि, वे सीधे तौर पर युद्ध नहीं चाहते, बल्कि आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाना चाहते हैं।
ट्रंप की बातों से यह भी पता चलता है कि वे अपनी सैन्य शक्ति को लेकर बहुत आश्वस्त हैं। वे मानते हैं कि अमेरिका दुनिया की सबसे मजबूत सेना है और वे किसी भी देश को आसानी से हरा सकते हैं। लेकिन, वे यह भी कहते हैं कि वे ऐसा नहीं करना चाहते क्योंकि इससे बहुत नुकसान होगा।
कुल मिलाकर, ट्रंप के ये बयान ईरान के खिलाफ अमेरिका की सख्त नीति का संकेत देते हैं। अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहता है और उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है। इसके लिए वे हर संभव तरीका अपनाने को तैयार हैं, जिसमें जहाजों को ब्लॉक करना और अन्य देशों से सहयोग मांगना शामिल है।