Major Initiative To Reduce Carbon Emissions In Tamil Nadu District level Decarbonization Plan Launched
तमिलनाडु में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जिला-स्तरीय डिकार्बोनाइजेशन योजना का लॉन्च
TOI.in•
तमिलनाडु ने कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में जिला-स्तरीय डिकार्बोनाइजेशन एक्शन प्लान और डिजिटल क्लाइमेट एक्शन ट्रैकर शुरू किया गया है। यह योजना स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, परिवहन को बदलने और पेड़ लगाने पर केंद्रित है। इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी। यह पहल राज्य को नेट-जीरो लक्ष्य की ओर ले जाएगी।
चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने राज्य में कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ज़िला-स्तरीय डीकार्बोनाइजेशन एक्शन प्लान (decarbonisation action plans) और एक डिजिटल क्लाइमेट एक्शन ट्रैकर ( digital climate action tracker ) लॉन्च किया है। यह पहल राज्य को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, परिवहन व्यवस्था को बदलने और प्रकृति-आधारित तरीकों से कार्बन सोखने में मदद करेगी।
यह योजना तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी और वासुधा फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में जलवायु-स्मार्ट विकास को बढ़ावा देना है। राज्य के वन सचिव, सुप्रिया साहू ने बताया कि डीकार्बोनाइजेशन का मतलब है कार्बन उत्सर्जन को कम करना या खत्म करना। यह जीवाश्म ईंधन की जगह नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, थर्मल पावर प्लांट की जगह सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से परिवहन क्षेत्र का प्रदूषण भी कम होगा।सरकार की डीकार्बोनाइजेशन रणनीति दो मुख्य बातों पर टिकी है। पहला, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना और दूसरा, पेड़ लगाने के प्रयासों को बढ़ाना ताकि अधिक कार्बन सोखा जा सके। इसमें जंगल, मैंग्रोव और समुद्री घास के पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाना शामिल है। ये सब मिलकर वायुमंडल से अधिक कार्बन सोखने में मदद करेंगे।
यह योजना शुरुआत में नीलगिरि, विरुधुनगर, कोयंबटूर और रामनाथपुरम जिलों में लागू की जाएगी। इन जिलों ने 2022-23 में तमिलनाडु के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 10.38% का योगदान दिया था। अध्ययनों से पता चलता है कि इन जिलों में 2050 तक स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, औद्योगिक दक्षता में सुधार, टिकाऊ परिवहन और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने से 92% तक उत्सर्जन कम किया जा सकता है। इसके अलावा, जंगल की बहाली, कृषि वानिकी और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से जीवंत करने से 2050 तक लगभग 2.97 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन सोखा जा सकता है।
तमिलनाडु क्लाइमेट एक्शन ट्रैकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो उत्सर्जन की निगरानी करेगा। यह प्रगति को ट्रैक करेगा और सबूत-आधारित नीतियों को बनाने में मदद करेगा। इससे राज्य अपने 'नेट-जीरो' लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। यह ट्रैकर यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर रहा है या नहीं।