'सूखा स्मारक' बनीं टंकियों को पानी की बंूद का इंतजार

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गाजियाबाद में नंदग्राम थाने के पास बनीं पानी की दो टंकियां 37 साल से सूखी पड़ी हैं। वर्ष 1989 में बनी ये टंकियां आज तक सिर्फ एक ढांचा हैं। इन्हें चालू करने पर गिरने का खतरा बताया गया था। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद इनसे पानी की एक बूंद भी सप्लाई नहीं हुई।

water tanks in ghaziabad become drought memorials waiting for water for 37 years

Anup.Pandey @timesofindia.com

n गाजियाबाद : नंदग्राम थाने के पास बनीं पानी की दो टंकियां करीब 37 साल बाद भी सूखा स्मारक बनकर रह गई हैं। डबल टंकी आज तक सिर्फ एक ढांचा और इलाके की पहचान बनकर रह गई है, लेकिन इससे कभी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों के अनुसार इस टंकी का निर्माण वर्ष 1989 में किया गया था। उम्मीद थी कि इससे आसपास के इलाकों में पानी की समस्या दूर होगी, लेकिन चार दशक बीतने के बाद भी इसमें एक बूंद पानी नहीं चढ़ाया गया। नतीजा यह है कि टंकी एक लैंडमार्क के रूप में जानी जाती है।

इलाके के पार्षद विरेन्द्र त्यागी ने बताया कि वह बचपन से इस टंकी को ऐसे ही खड़ा देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती समय में जब इसे चालू करने की बात हुई तो विभाग की ओर से बताया गया था कि यदि इसमें पानी भरा गया तो टंकी के गिरने का खतरा है। इसके बाद से ही इसे कभी उपयोग में नहीं लाया गया। इसके बाद से यह सिर्फ मीनार की तरह खड़ी है। बस किसी को एड्रेस बताना होता है तो वह कहता है कि डबल टंकी के पास आ जाना। इससे ज्यादा इसकी कोई उपयोगिता नहीं है।

यहां के रेजिडेंट श्रेयांश यादव ने बताया कि टंकी को बनाने में लाखों रुपये खर्च किए गए होंगे, लेकिन पानी की सप्लाई नहीं हुई। लोगों ने मांग की है कि या तो इस टंकी को सुरक्षित तरीके से उपयोग में लाया जाए या फिर इसके स्थान पर नई व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि पानी की व्यवस्था और बेहतर हो सके।

नगर निगम के जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद के अनुसार, यह टंकी जीडीए द्वारा बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि निर्माण के बाद जब इसे शुरू करने की योजना बनी तो दोनों टंकियों के बहुत पास होने के कारण संरचनात्मक खतरा बताया गया। इसी वजह से नगर निगम ने इसे हैंडओवर नहीं लिया।