n NBT रिपोर्ट, टीएचए
वैशाली योजना के सेक्टर-4 स्थित अलकनंदा और मंदाकिनी अपार्टमेंट के टावरों की जर्जर हालत को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ( जीडीए ) ने कुछ दिनों पहले ही निरीक्षण किया था। जीडीए की ओर से एक बार फिर पूर्व की तरह कार्रवाई के नाम पर दोनों टावरों के लिए एक पत्र जारी कर दिया गया है। पत्र में इन भवनों के रखरखाव और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं साथ ही यह पेशकश भी की गई है कि यदि टावर में रहने वाले लोग चाहें तो इसकी मरम्मत के लिए जीडीए आधा शुल्क वहन करने को तैयार है।
पत्र के मुताबिक, अलकनंदा और मंदाकिनी टावरों का निर्माण साल 1989-90 में किया गया था। इन दोनों टावर जी +9 श्रेणी के हैं और इनमें कुल 79-79 फ्लैट बने हुए हैं। समय के साथ रखरखाव के अभाव और विभिन्न स्थानों पर पानी के रिसाव के कारण इमारतों की स्थिति लगातार खराब होती गई है। आईआईटी दिल्ली की ओर से कराई गई जांच में भी भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका जताई गई है। जीडीए ने बताया कि वैशाली योजना को 31 मार्च, 2004 को नगर निगम गाजियाबाद को हस्तांतरित किया जा चुका है। इसके बावजूद संबंधित अपार्टमेंट असोसिएशनों की ओर से नियमित रखरखाव नहीं किए जाने से स्थिति गंभीर हो गई है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेट्रोफिटिंग कार्य कराया जाना आवश्यक है। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेट्रोफिटिंग का निर्णय अपार्टमेंट के निवासियों और असोसिएशनों को लेना होगा, जबकि जीडीए अपने हिस्से के अनुपात में खर्च वहन करने को तैयार है। अलकनंदा अपार्टमेंट में 12 और मंदाकिनी अपार्टमेंट में 14 फ्लैट अभी भी जीडीए के खाली पड़े हैं। निगम की ओर से वर्ष 2018 में भवनों की जर्जर स्थिति को देखते हुए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

