n NBT न्यूज, लखनऊ : राजधानी में बीते 22 अप्रैल को मेयर सुषमा खर्कवाल के कैंप कार्यालय पर हुए हंगामे और शिलापट पर कालिख पोतने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। घटना के विरोध में शनिवार को पर्वतीय एवं सैन्य समाज के हजारों लोगों ने जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा पर जुटकर प्रदर्शन किया। आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल महिलाओं और पूर्व सैनिकों ने इस कृत्य को लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या और शहर की प्रथम नागरिक का अपमान बताया।
बैरिकेडिंग पर हुई पुलिस से नोकझोंक: जीपीओ पर सभा के बाद प्रदर्शनकारी डीएम आवास की ओर कूच करने लगे। हालांकि, सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने डीआरएम ऑफिस के पास बैरिकेडिंग कर जुलूस को रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में मौके पर पहुंचे एसीपी हजरतगंज को डीएम के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर वैधानिक कार्रवाई और भविष्य में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
सम्मान और अस्मिता की लड़ाई: प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गणेश चंद्र जोशी और चेतन सिंह बिष्ट ने कहा कि मेयर के नाम की पट्टिका के साथ अभद्रता और असंसदीय भाषा का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, प्रदर्शन में शामिल नेहा सिंह ने कहा कि आज महिलाएं सड़कों पर इसलिए हैं क्योंकि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं बल्कि मर्यादा और सुरक्षा का है। प्रदर्शन में कैलाश उपाध्याय, हरीश पंत, भरत सिंह बिष्ट, हिमांशु पांडेय, दीवान सिंह अधिकारी, केएन चंदौला, गोपाल सिंह गैलाकोटी, चित्रा कांडपाल, समता बाफिला, जानकी अधिकारी और विनय सूदन सहित पर्वतीय समाज के कई दिग्गज शामिल रहे।




