कनेक्शन प्रीपेड या पोस्टपेड, नियामक आयोग देगा समाधान!

नवभारतटाइम्स.कॉम

बिजली कनेक्शन प्रीपेड होंगे या पोस्टपेड, यह फैसला अब नियामक आयोग करेगा। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की अधिसूचना के बाद भी उत्तर प्रदेश में प्रीपेड कनेक्शन दिए जा रहे हैं। उपभोक्ता परिषद ने इस पर सवाल उठाए हैं। आयोग जल्द ही पावर कॉरपोरेशन को दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। उपभोक्ताओं को दोनों विकल्प मिलने की उम्मीद है।

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n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : नए बिजली कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जाएंगे या फिर उपभोक्ताओं को पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों के विकल्प मिलेंगे, इसको लेकर नियामक आयोग जल्द कोई दिशा निर्देश पावर कॉरपोरेशन को दे सकता है। इसकी वजह यह है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की अधिसूचना को 26 दिन बीतने के बाद भी उसका उल्लंघन करके यूपी में प्रीपेड कनेक्शन ही दिए जा रहे हैं। जबकि उपभोक्ता परिषद का तर्क है कि प्राधिकरण ने एक अप्रैल को अधिसूचना जारी करके प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। इसके बाद भी यूपी में स्थिति अभी तक साफ नहीं हो सकी है।

1 अप्रैल को किया गया था बदलाव : पावर कॉरपोरेशन ने बीते साल सितंबर में नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जाने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद से यूपी में सभी उभोक्ताओं को प्रीपेड मोड में ही नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इस पर उपभोक्ताओं से कोई सहमति नहीं ली जा रही है। वहीं, विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) की व्यवस्था के मुताबिक कनेक्शन प्रीपेड मोड में लिया जाएगा या पोस्टपेड मोड में यह उपभोक्ता तय करेंगे न कि बिजली कंपनियां। हाल ही में इसी धारा के अनुरूप केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने अधिसूचना जारी करके प्रीपेड मोड में कनेक्शन देने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। ऐसे में पावर कॉरपोरेशन को अपना पुराना आदेश वापस लेकर नई अधिसूचना के मुताबिक नए आदेश करने चाहिए थे। हालांकि, अब तक ऐसा नहीं किया गया। अब नियामक आयोग को ही इस संबंध में आदेश जारी करने होंगे ताकि सीईए की अधिसूचना को यूपी में प्रभावी बनाया जा सके। बिजली संबंधी नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी नियामक आयोग की ही है।

'समाप्त अधिसूचना यूपी में प्रभावी, जांच हो' : बीते साल सितंबर में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता का आदेश जारी करते हुए पावर कॉरपोरेशन ने केंद्र सरकार की 2022 में जारी अधिसूचना का हवाला दिया था। उस अधिसूचना में नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जाने की अनिवार्यता थी। वहीं, दूसरी तरफ एक अप्रैल 2026 को उस अधिसूचना में संशोधित करके कनेक्शन में स्मार्ट मीटर इस्तेमाल किए जाने की व्यवस्था की गई थी। प्रीपेड मोड की अनिवार्यता को हटा लिया गया था। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पुरानी अधिसूचना समाप्त होने के बाद भी यूपी में इसे लागू रखने पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब अधिसूचना समाप्त हो चुकी है तो उसे यूपी में जारी कैसे रखा जा सकता है। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। यह उपभोक्ताओं के साथ धोखा है और उनके अधिकारों पर अतिक्रमण है। अवधेश ने कहा कि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को इस मसले में स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने इस मामले को नियामक आयोग भी ले जाने के संकेत दिए हैं।