निर्माण के साथ 10 साल मेनटेनेंस भी करेंगी कंपनियां

नवभारतटाइम्स.कॉम

उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन की परियोजनाओं को अब निर्माण करने वाली कंपनियां ही अगले 10 साल तक संचालित और अनुरक्षित करेंगी। यह व्यवस्था ग्रामीण पेयजल योजनाओं को लंबे समय तक चालू रखने के लिए की गई है। सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं से संचालन लागत में कमी आई है।

jal jeevan mission companies will now do 10 years of maintenance along with construction uttar pradesh becomes the first state

n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : प्रदेश में जल जीवन मिशन की परियोजनाएं लंबे समय तक चले, इसके लिए ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं का ऑपरेशन ऐंड मेनटेनेंस का काम परियोजना का काम करने वाली कंपनी ही देखेगी। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य बन गया है। इसके तहत निर्माण एजेंसियां अगले 10 साल तक ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय में काम करेंगी। राज्य सरकार ने इस मॉडल को ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम से जोड़ा है, जिसके तहत गांवों को सिर्फ पानी पाने वाला उपभोक्ता नहीं बल्कि जल प्रणाली का स्वामी, संरक्षक और प्रबंधक बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि राज्य में हर ग्रामीण के घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन योजना चलाई जा रही है। इसके तहत बुंदेलखंड और विन्ध्य क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक घरों तक नल से जल की सप्लाई की जा रही है।

क्यों पड़ी योजना की जरूरत : नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव के मुताबिक यह दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनी योजनाएं वर्षों तक चलती रहें। दरअसल, पहले ग्रामीण जल योजनाएं कमजोर रखरखाव, बिजली बिलों के बोझ और स्थानीय भागीदारी के अभाव में बंद हो जाती थीं, लेकिन भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए कंपनियों को 10 साल तक ऑपरेशन ऐंड मेनटेनेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बिजली लागत कम करने के लिए तैयार की गईं सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाएं : ऑपरेशन ऐंड मेनटेनेंस की जिम्मेदारी के साथ-साथ योजना में बिजली बिल की लागत को कम करने के लिए सौर ऊर्जा मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत राज्य में 33,157 जल योजनाएं सोलर ऊर्जा पर आधारित बनाई गई हैं, जिससे संचालन लागत में करीब 52 प्रतिशत की कमी आई है। इसके अलावा लोगों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां बनाई गई हैं। ये समितियां योजना की प्लानिंग से लेकर रोजमर्रा के संचालन और रखरखाव में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जल गुणवत्ता निगरानी के लिए राज्य में 75 जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं, एक राज्य स्तरीय लैब, पांच मोबाइल NABL मान्यता प्राप्त लैब स्थापित की गई हैं। उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत सिटीजन चार्टर लागू किया जा रहा है।