सुरक्षा में चूक

नवभारतटाइम्स.कॉम

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर हुए हमले ने उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना चिंताजनक है, खासकर तब जब ट्रंप को लगातार धमकियां मिल रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों को इस चूक की गहन जांच करनी चाहिए। लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और असहमति व्यक्त करने के अन्य तरीके मौजूद हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा आलोचना झेलने वाले नेताओं में से एक हैं। उनकी नीतियों और फैसलों, इस समय खासकर ईरान पर लिए गए रुख का विरोध अमेरिका के बाहर भी हो रहा है। इसके बावजूद उन पर जिस तरह से हमला किया गया, वह चिंताजनक है। इससे राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

सुरक्षा में कमी । ट्रंप का कार्यक्रम राजधानी वॉशिंगटन के एक होटल में था। हमलावर को एक सिक्यॉरिटी पॉइंट से पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि आरोपी कैलिफोर्निया का रहने वाला है और उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। फायरिंग की पहली आवाज के साथ ही सुरक्षाकर्मियों ने जिस तरह की तेजी दिखाई, वह तारीफ के काबिल है। ढाई हजार से ज्यादा लोगों के बीच से राष्ट्रपति और दूसरे महत्वपूर्ण लोगों को बाहर निकालना कम चुनौतीपूर्ण नहीं, लेकिन इससे सुरक्षा एजेंसियां दूसरे अहम सवालों से बरी नहीं हो जातीं।

धमकियां और हमले । किसी हथियारबंद शख्स का राष्ट्रपति के कार्यक्रम के इतने करीब पहुंचना भी बेहद गंभीर लापरवाही है। वहां ट्रंप ही नहीं, उनके प्रशासन से जुड़े कई दूसरे लोग भी थे, जो निशाना बन सकते थे। और यह चूक तब हुई है, जब ट्रंप को लगातार धमकियां मिल रही हैं और पहले भी हमले हो चुके हैं। इस साल फरवरी में ही ट्रंप के आवास Mar-a-Lago में एक शख्स हथियार लेकर घुस गया था, जिसे मार गिराया गया। वहीं, जुलाई 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर गोली चलाई गई थी, जो कान को छूते हुए निकल गई। इसके अलावा भी कई घटनाएं हुई हैं।

समीक्षा की जरूरत । विडंबना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद जितना ताकतवर माना जाता है, उससे जुड़े खतरे उतने ही बड़े हैं। अब्राहम लिंकन से लेकर जॉन एफ. कैनेडी तक - अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है। ट्रंप पर भी बार-बार हो रहे हमले बताते हैं कि उनकी सुरक्षा की फिर से समीक्षा किए जाने की जरूरत है।

गहरी जांच । जब ट्रंप पर गोली चलाई गई, तो उसके बाद चुनाव में उनकी लोकप्रियता बढ़ गई थी। घटना ने उनके समर्थकों को एकजुट कर दिया था। हो सकता है कि इस बार भी घरेलू मोर्चे पर चुनौती झेल रहे ट्रंप प्रशासन को थोड़ी राहत मिल जाए। लेकिन, इन घटनाओं के पीछे की वजहों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा है कि लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं है। असहमति व्यक्त करने के कई और तरीके भी हैं।