n मुंबई: शेयर मार्केट में बिकवाली का दबाव बना हुआ है और निफ्टी ने पिछले हफ्ते शुक्रवार को 24000 का लेवल ब्रेक किया, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा है। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने के आसार से बाजार में उछाल आ सकता है, लेकिन फिर भी जब तक ईरान-अमेरिका डील पर कोई स्पष्ट सकारात्मक निर्णय नहीं हो जाता, तब बाजार में दबाव बना रहेगा। इस सप्ताह बाजार की ईरान-अमेरिका के बीच होनें वाली संभावित बातचीत पर नज़रें रहेंगी। इस बीच अगर बाजार में दबाव बना रहा तो निफ्टी के अगले सपोर्ट लेवल टेस्ट हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह हफ्ता कामकाजी दिनों के लिहाज से छोटा होगा क्योंकि शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के मौके पर शेयर बाजार बंद रहेंगे।
जानकारों के अनुसार अमेरिका से आने वाले GDP और मैन्युफैक्चरिंग आंकड़े भी बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित करेंगे। कुल मिलाकर, इस हफ्ते निवेशकों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि बाजार पूरी तरह से खबरों और वैश्विक तनाव के इशारों पर नाचने वाला है।
निवेशकों की नजरें इस समय सिर्फ घरेलू बाजार पर ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल पर भी टिकी हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस हफ्ते बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन बड़े कारकों से तय होगी, पहला पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, दूसरा कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें और तीसरा देश की बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, ‘आगे बाजार काफी हद तक खबरों पर आधारित और उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों के रुझान और वैश्विक संकेतकों पर रहेगी। यदि तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आती है तो इससे आर्थिक चिंताओं में कमी आ सकती है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने या लंबे समय तक व्यवधान रहने से बाजार में फिर से अस्थिरता और मुनाफावसूली देखी जा सकती है।’
अमेरिका और ईरान में सोमवार को बातचीत हो सकती है, जिसके सकारात्मक नतीजे होने पर बाजार में उछाल आ सकता है। क्रूड ऑयल में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है जो निवेशकों की चिंता का विषय है। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ के ओपन होने पर कोई सहमति बनती है तो क्रूड ऑयल के भाव तेजी से नीचे आ सकते हैं, जिससे इक्विटी मार्केट को राहत मिल सकती है. बाज़ार की निगाहें ईरान-अमेरिका की संभावित बातचीत पर टिके हुई है, जिससे बाज़ार की अगली दिशा तय होगी। कॉरपोरेट जगत की हलचल भी इस हफ्ते बाजार को काफी प्रभावित करेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को अपने नतीजे घोषित किए, जिसमें मार्च तिमाही के लाभ में 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण कंपनी के मुख्य बिजनेस पर दबाव देखा गया है। आने वाले दिनों में अल्ट्राटेक सीमेंट, कोल इंडिया, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस और अदाणी पावर जैसी दिग्गज कंपनियां अपने नतीजे पेश करेंगी। इसके अलावा, दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले पर भी टिकी हैं, जो 29 अप्रैल को होना है। घरेलू मोर्चे पर 28 अप्रैल को औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े जारी होंगे।

