आंखें मलने से थोड़ी साफ़ दिखती है दुनिया

नवभारतटाइम्स.कॉम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून की तलाश अक्सर मोबाइल स्क्रीन पर खत्म होती है। स्क्रीन देखते-देखते आंखों में थकान और सिर में भारीपन महसूस होता है। ऐसे में आंखें मलने से तुरंत राहत मिलती है। यह शरीर और दिमाग की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है।

why does rubbing eyes provide relief know the science and benefits behind it

आज के समय में सुकून की तलाश अक्सर खत्म होती है मोबाइल स्क्रीन पर, लेकिन एक वक्त के बाद वहीं से शुरू हो जाती है एक नई थकान। स्क्रीन देखते-देखते आंखें दुखने लगती हैं और सिर भारी। ऐसे में अनजाने ही हाथ पहुंचते हैं आंखों तक। और जैसे ही हम उन्हें हल्के से मलते हैं, अलग ही तरह का आनंद महसूस होता है। पल भर में जैसे सारी थकान पिघलकर कोरों से बह निकली हो।

यह कोई जादू नहीं, शरीर और दिमाग की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। कई तरह के शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल बदलावों का परिणाम। और इसकी शुरुआत होती है ट्राइजेमिनल नर्व (Trigeminal nerve) से। इस नस का काम है चेहरे से दिमाग तक संवेदनाएं पहुंचाना। आंखें मलने पर इस नर्व पर दबाव पड़ता है और उत्तेजित होकर वह दिमाग को आराम का सिग्नल भेजती है। तुरंत मिलने वाली राहत इसी संदेश का नतीजा है। आंखों के आसपास की मांसपेशियां पूरे दिन स्क्रीन और रोशनी से थक जाती हैं। हल्का दबाव पड़ते ही उनका तनाव कम होने लगता है। यह अनुभव वैसा ही है जैसे सिर या कंधे की हल्की मालिश। इसी दौरान एक और दिलचस्प प्रक्रिया होती है शरीर में, जिसे कहते हैं ओकुलोकार्डियक रिफ्लेक्स। इसमें आंखों पर हल्का दबाव पड़ने से दिल की धड़कन थोड़ी धीमी हो जाती है, और यही धीमापन हमारे शरीर को तनाव से बाहर निकाल कर ले जाता है एक शांत स्थिति में। जब बेचैनी खत्म होती है और स्थिरता आती है। यह पल है, जब आंख मलने का आनंद सिर्फ आंखों तक सीमित न होकर पूरे शरीर में फैलता है।

और भी कई खेल हैं नसों की इस छोटी हरकत के। कई बार आंख मलते समय कुछ पैटर्न दिखने लगते हैं - हल्की रोशनी, रंग या रेखाएं। दिमाग की बुनी तस्वीरें हैं ये सारी, जो इस अनुभव को और रोचक बना देती हैं। और भी फायदे हैं इस आदत के। आंख मलने से आंसुओं का स्राव बढ़ता है। इनसे मिलती है नमी और ताजगी। यही वजह है कि आंख मलने के बाद दुनिया कुछ ज्यादा ही साफ दिखने लगती है, कुछ ज्यादा चमकीली और हल्की-सी नई भी।

आखिर में बात इतनी-सी है कि आंख मलना शरीर की अपनी रिलैक्सेशन थिरेपी है। इसके लिए न चवन्नी चाहिए और न किसी और की मदद। शरीर ने आनंद के पलों का अपना इंतजाम बना रखा है। लेकिन, सावधानी फिर भी चाहिए। आंखों को बार-बार या जोर से रगड़ने पर कॉर्निया पर असर पड़ सकता है। हाथों की गंदगी से संक्रमण का खतरा भी है। तो फ्री होते हुए भी सतर्क रहना जरूरी है। और एक आखिरी शर्त इस आनंद को पाने की - इसे करते समय भी नजरें स्क्रीन में न डूबी हों।