n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : यूपी में MBBS और BDS के लिए पिछले साल हुए नैशनल एलिजीबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) की काउंसिलिंग में शामिल अभ्यर्थियों को उनकी सिक्यॉरिटी मनी रिफंड की जाने लगी है। काउंसलिंग के 45 दिन में रिफंड होना था, लेकिन हजारों अभ्यर्थी पांच महीने से लेकर नौ महीने बाद भी रिफंड का इंतजार कर रहे थे। NBT ने 28 अप्रैल के अंक में हजारों स्टूडेंट्स की सिक्यॉरिटी मनी फंसे होने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसका संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने रिफंड में लेटलतीफी के लिए महानिदेशालय के डॉक्टर राहुल और आशुलिपिक इरफान अंसारी को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही जिन बैंकों में सिक्यॉरिटी मनी की रकम तय समय के बाद भी जमा रही, लेकिन उनकी तरफ से रिफंड को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए, उनका खाता भी बंद करवाने का निर्देश जारी कर दिया गया।
यूपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,725 और निजी संस्थानों में 7,350 एमबीबीएस की सीटें हैं। इनपर दाखिला लेने के लिए पिछले साल 18 जुलाई से 28 जुलाई तक पहले राउंड की काउंसलिंग हुई थी। इसके बाद सितंबर में दूसरी, अक्टूबर में तीसरी और नवंबर में चौथे राउंड की काउंसलिंग हुई। इसमें करीब 30 हजार स्टूडेंट्स ने सरकारी और निजी कॉलेजों में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। सरकारी कॉलेज के लिए 30 हजार रुपये और निजी कॉलेज के लिए दो लाख रुपये सिक्यॉरिटी मनी जमा करवाई गई थी। नियम के मुताबिक काउंसलिंग खत्म होने के 45 दिन के भीतर यह रकम वापस होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक पिछले साल हुई काउंसलिंग की सिक्यॉरिटी मनी वापस पाने के लिए इस साल 27 अप्रैल तक भटक रहे थे। हालांकि, NBT में खबर प्रकाशित होने के बाद 28 अप्रैल से सभी स्टूडेंट्स की सिक्यॉरिटी मनी उनके बैंक खातों में भेजी जाने लगी।
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय सिंह ने बताया कि 28 अप्रैल को उनके खाते में 30 हजार रुपये वापस आ गए। उन्होंने इसके लिए नवभारत टाइम्स का आभार जताते हुए कहा कि इससे हजारों अभिभावकों को राहत मिली है क्योंकि एमबीबीएस के नए सत्र में दाखिले के लिए 3 मई को नीट यूजी की प्रवेश परीक्षा होनी है और जिन अभ्यर्थियों का पिछले साल दाखिला नहीं हुआ था, उन्हें इस बार काउंसलिंग में फिर सिक्यॉरिटी मनी जमा करनी होगी।
बैंकों को फायदा पहुंचाने के लिए लेटलतीफी का आरोप : नीट यूजी की काउंसलिंग में पिछले साल करीब 30 हजार अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग का रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसमें सिक्यॉरिटी मनी के तौर पर एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक में करीब 308 करोड़ रुपये जमा हुए। आरोप लग रहा है कि 45 दिन में इसे रिफंड न करने के महानिदेशालय के अधिकारी और कर्मचारियों ने एक तरह से बैंकों को भारी फायदा पहुंचाया, क्योंकि अभिभावकों को बैंकों से 45 दिन से ज्यादा जमा रकम पर भले कोई ब्याज न मिला हो, लेकिन महीनों तक जमा इतनी बड़ी रकम का बैंकों को फायदा जरूर हुआ।



