प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने जालसाजी या धोखाधड़ी से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त किया है, तो दशकों की सेवा भी वैधता नहीं दे सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मेरठ की शिक्षिका वीणा मेनन की याचिका को खारिज करते हुए दिया।
याची की नियुक्ति 1989 में मेरठ के एक स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब मानव संपदा पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने के दौरान याची ने 1984 की हाईस्कूल की मार्कशीट और प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया, जो लंबे समय से फर्जी टीसी के आधार पर बोर्ड ने रोके गए रिजल्ट की श्रेणी में डाल दिया था। जांच में सामने आया कि याची ने हाई स्कूल परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा 8 का स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) लगाया था, वह फर्जी था। इन आधारों पर याची की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए वेतन रोक दिया गया था।



