नए आयु नियम से दांव पर लगा बच्चों का साल

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नए आयु नियम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। पहली कक्षा में प्रवेश के लिए अब छह साल की उम्र अनिवार्य है। कुछ दिनों के अंतर से बच्चे अगली कक्षा में नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें पिछली कक्षा फिर से पढ़नी पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन सरकारी नियमों का पालन करने को मजबूर है।

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n NBT न्यूज, गुड़गांव

अब पहली क्लास में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष तय कर दी गई है और 31 मार्च तक यह आयु पूरी न होने पर प्रवेश नहीं मिलेगा। साथ ही पहले दी जाने वाली अनौपचारिक ग्रेस पीरियड की सुविधा भी खत्म कर दी गई है। नए सत्र में प्रवेश के लिए लागू आयु नियमों ने पैरंट्स को मुश्किल में डाल दिया है। कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां बच्चे महज कुछ दिनों के अंतर से निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पा रहे और उन्हें अगली कक्षा में जाने के बजाय एलकेजी या यूकेजी दोहराने को कहा जा रहा है।

एक पैरंट ने बताया कि उनका बेटा 20 अप्रैल को छह साल का हो जाएगा। नए नियमों से उन्हें पिछली क्लास दोबारा से पढ़नी होगी, जबकि पहले से वह उस क्लास को पढ़ चुका है और स्कूल को फीस भी पूरी दी गई है। अब बच्चे को दोबारा से वही क्लास पढ़ाना पड़ेगा। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चे की उम्र कुछ ही दिन कम होने से अगली क्लास में नहीं भेजा जा सकता। पहले स्कूल ऐसे मामलों में तीन से छह महीने तक की छूट देते थे। सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। हरियाणा शिक्षण संस्थान संगठन के प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यशपाल यादव का कहना है कि संगठन की ओर से नए निर्देशों को लेकर निदेशालय को पत्र लिखा है। मांग की गई है कि उम्र संबंधी नियमों को स्पष्ट किया जाए। जिन बच्चों ने पहले से क्लास पढ़ ली है, उनको आगे दाखिला मिलेगा या नहीं, यह निदेशालय के निर्देश के आधार पर ही तय होगा।