n वर्षा भड़ाना, फरीदाबाद
ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-87 स्थित एसआरएस रॉयल हिल्स सोसायटी के रेजिडेंट्स को फ्लैट्स की रजिस्ट्री न मिलने से लंबे समय से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेजिडेंट्स का आरोप है कि बिल्डर द्वारा रजिस्ट्री के नाम पर अवैध रूप से मोटी रकम की मांग की जा रही है। इससे सोसायटी के करीब 1200 परिवारों में रोष बढ़ता जा रहा है। रेजिडेंट्स जल्द ही इकट्ठा होकर डीसी से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराने और उचित समाधान की मांग करने की योजना बना रहे हैं। लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए भी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
एसआरएस रॉयल हिल्स सोसायटी में 1400 से अधिक फ्लैट्स है। रेजिडेंट्स को 2014 में पजेशन मिला। यहां करीब 1200 परिवारों को पिछले 10-12 साल से अपने फ्लैट्स की रजिस्ट्री नहीं मिल रही है। रेजिडेंट्स का कहना है कि उन्हें अपने फ्लैट्स खरीदे हुए करीब साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस बीच, हाल ही में प्रॉपर्टी से जुड़े मामले प्रवर्तन निदेशालय (ED) और कोर्ट से स्पष्ट हो जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि रजिस्ट्री के लिए जब बिल्डर के पास जा रहे हैं तो वह इस मौके का फायदा उठाकर हर फ्लैट के लिए करीब 3.5 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग कर रहा है। रेजिडेंट्स ने बताया कि 2011-12 में करीब 30 से 45 लाख रुपये के फ्लैट्स लिए गए थे। उस दौरान इलाके का सर्कल रेट भी कम था, लेकिन 10 साल बाद सर्कल रेट भी बढ़ गया है और रजिस्ट्री चार्जेस भी बढ़ गए हैं। ऐसे में निवासियों की बाधा कम नहीं हो रही है। रेजिडेंट्स का आरोप है कि यह रकम दबाव बनाकर वसूली जा रही है और यदि भुगतान नहीं किया जाता तो रजिस्ट्री में जानबूझकर देरी की जा रही है। लोगों ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत लगाकर ये फ्लैट खरीदे थे और रजिस्ट्री न मिलने के कारण वे मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं। इस समस्या से परेशान होकर सोसायटी के लोगों ने अब प्रशासन का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। रेजिडेंट्स ने मांग की है कि डीसी सोसायटी में कोई नोडल अधिकारी नियुक्त कर सोसायटी के मामलों की जांच के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराए, जिससे राहत मिले।
प्रॉपर्टी आईडी भी नहीं बन रही :
रेजिडेंट्स का कहना है कि प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए वे नगर निगम में चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नहीं बन रही। यहां करीब 200 परिवारों को रजिस्ट्री मिल चुकी है, लेकिन रजिस्ट्री होने के बाद भी नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी आईडी के लिए बिल्डर से ऑडिट लाने के लिए कहा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि बिल्डर इसका भी फायदा उठाते हुए ऑडिट देने के लिए 25 हजार रुपये की मांग कर रहा है।



