n NBT रिपोर्ट, लखनऊ
खरगापुर इलाके में रहने वाले कैंसर पीड़ित बुजुर्ग व उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर जालसाजों ने 1करोड़ 29 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। साइबर जालसाजों ने एटीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर पीड़ितों को निशाना बनाया। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की पड़ताल की जा रही है।
गोमतीनगर विस्तार स्थित खरगापुर इलाके में रहने वाले बुज़ुर्ग दिलीप कुमार पांडेय ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी आराधना पांडेय के पास 27 मार्च की रात 10 बजे वॉट्सऐप पर चार लोगों के फोटो भेजे गए। दावा किया गया कि चारों आतंकवादी हैं। चारों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में आराधना का नाम लिया है। इसके अलावा पीड़िता के आधार कार्ड से सिम लिया गया है। उस सिम का उपयोग आतंकवादी घटनाओं में किया गया है। इसके अलावा पीड़िता के आधार के जरिए मुंबई में एक बैंक अकाउंट खोला गया। उस बैंक अकाउंट में हवाला के जरिए आतंकवादियों की मदद की गई है।
पुलिस की वर्दी पहन
कर किया कॉल
इसके बाद पीड़िता आराधना के पास एक विडियो कॉल की गई। कॉल करने वाले ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। वह खुद को एटीएस का अधिकारी बता रहा था। इसके अलावा सीबीआई अधिकारी बनकर भी पीड़िता के पास कॉल की गई। पीड़िता को डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। पीड़ित दिलीप के मुताबिक 4 से 10 अप्रैल के बीच उनकी पत्नी को डिजिटल करके 1 करोड़ 29 लाख रुपये अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में जांच के नाम पर ट्रांसफर करवा लिए गए।
झांसा दिया गया कि रिजर्व बैंक रुपयों की जांच करेगी। जांच में निर्दोष मिलने पर रुपये वापस करने की बात कही गई थी। पीड़ित के मुताबिक उनके वॉट्सऐप पर सुप्रीम कोर्ट दिल्ली का लोगो लगा हुआ एक आरोप पत्र भी भेजा गया था। जिसके कारण दोनों डर गए थे। पीड़िता दिलीप कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्हें कैंसर है। उनका इलाज चल रहा है। पर, अब इलाज के रुपये तक नहीं बचे हैं। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के प्रभारी का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की पड़ताल की जा रही है।

