हमारा दर्द भी समझे सरकार, टैक्स में छूट या सब्सिडी मिले

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औद्योगिक संगठनों ने सरकार के 21% वेतन वृद्धि के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय बिना किसी बातचीत के थोपा गया है और इससे उद्योगों पर भारी बोझ पड़ेगा। संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह इस आर्थिक बोझ को वहन करे या उद्योगों को सब्सिडी और टैक्स में राहत दे।

demand for tax exemption or subsidy from government growing protest by entrepreneurs

n NBT न्यूज, ग्रेनो : औद्योगिक संगठनों ने शुक्रवार को संयुक्त प्रेस वार्ता की और अपना विरोध दर्ज कराया। सरकार और प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी उद्यमी से संवाद किए 21 प्रतिशत की वेतन वृद्धि का फैसला थोप दिया गया है। अचानक लिया गया यह निर्णय उद्योगों को पूरी तरह डुबो देगा। इंडियन इंडस्ट्रीज असोसिएशन (IIA), इंडियन एंटरप्रेन्योर असोसिएशन, लघु उद्योग भारती और ईकोटेक-12 असोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक सुर में विरोध दर्ज कराया। आईआईए के चेयरमैन सरबजीत सिंह ने कहा कि प्रशासन मजदूर आंदोलन को संभालने में पूरी तरह विफल रहा और अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए रात के अंधेरे में बिना किसी उद्यमी से संवाद किए 21 प्रतिशत की वेतन वृद्धि का फैसला थोप दिया गया। यह निर्णय उद्योगों को पूरी तरह डुबो देगा, क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ने के बाद बाजार इन दामों को स्वीकार नहीं करेगा।

‘बिना तैयारी के लिया फैसला’

इंडियन एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन की ओर से संजीव शर्मा और पुष्पेंद्र तिवारी ने कहा कि उद्योगों पर पहले से ही आर्थिक बोझ है, ऐसे में बिना तैयारी के लिया गया यह फैसला पलायन को मजबूर करेगा। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वेतन बढ़ाना चाहती है, तो उसे उद्योगों को सब्सिडी या टैक्स में राहत देनी चाहिए। इंडियन बिजनेस असोसिएशन की खुशबू ने उद्यमियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया और कहा कि भय के माहौल में व्यापार करना असंभव है। लघु उद्योग भारती के नरेश गुप्ता और संजय बत्रा ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिना स्टेक होल्डर्स की राय लिए सरकार का यह कदम एमएसएमई क्षेत्र की कमर तोड़ देगा। ईकोटेक-12 असोसिएशन के साहिल और करीब 40 से अधिक उद्यमियों ने प्रशासन पर अपनी जान बचाने के लिए उद्योगपतियों की बलि चढ़ाने का आरोप लगाया। आईआईए के जेएस राणा और अमित शर्मा ने स्पष्ट किया कि उद्यमी सरकार के साथ हैं, लेकिन सरकार को भी उनका दर्द समझना होगा। उन्होंने मांग की कि इस आर्थिक बोझ को सरकार वहन करे और भविष्य में ऐसे अचानक फैसलों पर रोक लगे। सरकार तुरंत राहत पैकेज या सब्सिडी का ऐलान नहीं किया, तो कारखानों पर ताले लटकना निश्चित है।