पेपर लीक वाली लड़की

Contributed byक्षमा शर्मा|नवभारतटाइम्स.कॉम
paper leak girl a 70s story still relevant today
पेपर लीक पर घमासान छिड़ा है। सरकार ने कानून और सख्त कर दिया है, पर विवाद रुक नहीं रहा। ऐसे में याद आती है बेहद पुरानी बात, जो 70 के दशक की है। तब मैं 10वीं में थी। 9वीं पास करते ही बहुत से लोगों ने डराया कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा पास करना कोई हंसी-खेल नहीं। अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। तब अखबार में रिजल्ट छपता था। जिसके पास अखबार होता, वह रिजल्ट बताने की फीस लेता। कभी कोई शहर जाकर अखबार खरीद भी लाता। उन दिनों आज की तरह हर घर में न्यूजपेपर नहीं आता था और न ही बच्चों के 90-95% नंबर। पूरे जिले में मुश्किल से दो-चार बच्चे फर्स्ट डिविजन पास होते। सेकंड और थर्ड डिविजन वाले भी अपने को किसी से कम ने समझते।

अब ऐसी कठिन परीक्षा देनी थी तो पहले दिन से ही पढ़ाई शुरू हो गई। आए दिन क्लास टेस्ट होते। कम नंबर आने पर अध्यापिकाओं से खूब डांट पड़ती। घर वालों को बताने में भी शर्म आती। साथ में बहुत धनी परिवार की एक लड़की भी पढ़ती थी। जिन दिनों घरों में साइकल होना भी बड़ी बात थी, तब उसे छोड़ने घरवाले बाइक से आते। रहती भी खूब सलीके से थी। वह लड़की जान-बूझकर सबसे पीछे बैठती। पर्चियों पर कुछ लिख-लिखकर आसपास बैठी लड़कियों को देती रहती। अगर टीचर देख लेतीं तो पर्ची लेने और देने वाली लड़की, दोनों को डांट पड़ती। पर्ची फेंकने वाली इस लड़की का मन पढ़ने में बिल्कुल न लगता। वह कहती कि माता-पिता जबरदस्ती स्कूल भेज देते हैं। क्लास टेस्ट और तिमाही-छमाही में उसके कम नंबर आते थे। टीचर तरस खाकर उसे 33 नंबर दे देतीं, ताकि पास हो सके।
खैर, जिस बोर्ड की परीक्षा से इतना डराया गया था, वह आ गई। इम्तिहान से पहले रोल नंबर लेने और सीटिंग अरेंजमेंट देखने जाना पड़ा। पेपर मिलने से पहले दिल इतनी जोर से धड़कता जैसे मुंह से बाहर ही आ जाएगा। परीक्षा और प्रैक्टिकल में लगभग डेढ़ महीने का समय निकल गया। रिजल्ट का इंतजार भी आखिरकार खत्म हुआ। फिर 11वीं की कक्षा शुरू हुई, तो वही लड़की इठलाते हुए आई। दूसरी लड़कियों को आश्चर्य हुआ कि यह भी पास हो गई! सिर्फ पास ही नहीं, उसके बहुत अच्छे नंबर भी आए थे। अध्यापिकाओं को भी भरोसा नहीं हो रहा था, लेकिन उसकी मार्कशीट तो गवाही दे रही थी। एक दिन उसने अपने अच्छे नंबरों का राज बता दिया कि उसके भाई ने 10 हजार रुपये में पेपर खरीदे थे। परीक्षा से पहले उसने एक-एक पेपर रट लिया था। यह तब की बात है, जब 10 हजार किसी-किसी के पास ही होते। आज उनकी वैल्यू लाखों में होगी।