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यूं बढ़ा दिमाग़
नवभारतटाइम्स.कॉम•
दिलीप लाल
इंसान का दिमाग आज जितना बड़ा और जटिल है, वह एक दिन में नहीं बना। करीब 40 लाख वर्षों में हमारे पूर्वजों के मस्तिष्क का आकार लगभग 300 ग्राम से बढ़कर करीब 1400 ग्राम तक पहुंचा। वैज्ञानिक लंबे समय से मानते रहे हैं कि मांस और दूसरे पोषक खाद्य पदार्थों से मिली ऊर्जा ने इस विकास में बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन, एक अध्ययन ने मानव विकास की इस कहानी में फलों की मिठास का नया अध्याय जोड़ दिया है। ‘साइंस’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, फलों और शहद जैसे मीठे खाद्य पदार्थों से मिलने वाली प्राकृतिक शर्करा ने भी हमारे पूर्वजों के बढ़ते दिमाग को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी। खास बात यह है कि मस्तिष्क का बड़ा होना उस दौर में शुरू हो गया था, जब इंसान ने आग पर खाना पकाना सीखा भी नहीं था। इसलिए अनाज और दूसरे स्टार्च युक्त खाद्य पदार्थों को पकाकर आसानी से खाने और पचाने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। शोधकर्ताओं ने चिंपैंजी और शुरुआती मानव पूर्वजों के भोजन से जुड़ी जानकारियों, जीवाश्मों, दांतों और शरीर की ऊर्जा जरूरतों का विश्लेषण किया। उनके अनुसार, पूर्वजों की ऊर्जा का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा फलों से आता रहा होगा। हालांकि फलों को तलाशना भी चुनौतीपूर्ण था। शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसी जरूरतों ने स्मरण शक्ति और दिमागी विकास को बढ़ावा दिया होगा।