UPI में महंगाई

नवभारतटाइम्स.कॉम
will upi be charged a new era of inflation or an effort to strengthen the system
UPI क्यों हिट है? इसलिए कि वह मुफ्त है। अब चर्चा है कि इस तरीके से लेनदेन पर चार्ज लग सकता है। कहा जा रहा है कि लगभग 95% हिस्सा चार्ज से बाहर ही रहेगा। यह केवल बड़े व्यापारियों पर लगाया जा सकता है। हालांकि, कारोबारी किसी एक्स्ट्रा खर्च को परोक्ष रूप से ग्राहकों पर डालने की कोशिश करते हैं। यह बदलाव लोगों में फिर से नकदी के उपयोग को बढ़ा सकता है।

कभी दुकानदारों से पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंकों और पेमेंट कंपनियों को MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) चार्ज मिलता था। 2020 में ज्यों ही MDR हटा दिया गया, UPI लेन-देन मुफ्त हो गया। इस चार्ज के पैरोकारों का कहना है कि UPI को विकसित करने के लिए हमेशा सरकारी पैसे पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। ट्रांजैक्शन में खर्च आता है। MDR फिर से लाने की बहस 2022 में शुरू हुई थी, जब रिजर्व बैंक के एक चर्चा पत्र में यह मुद्दा उठाया गया था। वित्त मंत्रालय ने उस समय इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया था। अब रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल में कहा है कि UPI लेनदेन की लागत किसी न किसी को तो चुकानी होगी। एक बिल के जरिये सरकार को यह अधिकार मिलने जा रहा है कि वह चाहे तो UPI लेनदेन पर MDR लगा सकती है। इसकी संभावना कम है कि सरकार अधिकांश UPI लेन-देन पर ऐसा शुल्क लगाएगी। फिर भी कहा जा रहा है कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर व्यापारियों को MDR देना पड़ सकता है। रिजर्व बैंक नोट छापने पर करोड़ों रुपये खर्च करता है। नकद छापना ही नहीं, बल्कि उसे गिनना, सुरक्षित रखना, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना और उसकी सत्यता की जांच करना भी महंगा काम है। बैंकों को भी नकदी संभालने के लिए ATM चलाने पड़ते हैं। UPI ने इन खर्चों को कम करने में मदद की है।
खुदरा व्यापार प्रणाली पहले से ही जटिल है। MDR लागू करने से यह और अधिक उलझ सकती है। सरकार ने 2021 में कम मूल्य वाले UPI लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत वह ₹2,000 से कम मूल्य के UPI लेनदेन के लिए सब्सिडी देती है। फिलहाल UPI की लागत का कुछ हिस्सा बैंकों और पेमेंट कंपनियों की ओर से खुद उठाया जा रहा है, जबकि बाकी का हिस्सा टैक्सपेयर्स के जिम्मे है। 2000 की लिमिट रखने से छोटे किराना दुकानदारों और कम मूल्य के भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को सुरक्षा मिलेगी, जबकि बड़े व्यापारी सिस्टम के रखरखाव में योगदान देंगे।