हड्डियों के डॉक्टर ने रेट्रो धुनों से जोड़े दिल

नवभारतटाइम्स.कॉम
bones doctor connected hearts with saxophone spread magic with retro tunes
n NBT न्यूज ,लखनऊ : आपने ऑर्थोपेडिक सर्जन को टूटती हड्डियां जोड़ते देखा होगा, लेकिन रविवार की शाम डॉक्टर साहब ने अपने सुरों से सीधे लोगों के दिल जोड़ दिए। मौका था जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव के दो दिवसीय 'कल्चरल कारवां-विरासत, लखनऊ 2026' का, जिसका आगाज विश्वेश्वरैया हॉल में हुआ।

समारोह की यह खास पेशकश पद्मश्री डॉ. यश गुलाटी की रही। अपोलो अस्पताल नोएडा के जाने-माने सर्जन ने स्टेथोस्कोप की जगह सेक्सोफोन थामा और 'मोहब्बत में जो हो गया है', 'आगे भी जाने न तू' और 'दम मारो दम' जैसे रेट्रो गानों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद साकिब खान ने अपनी गायकी से समां बांध दिया।
'मधुराष्टकम' पर सोलो

कार्यक्रम की शुरुआत कथक नृत्यांगना डॉ. ऋचा जैन की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। उन्होंने प्रस्तुति का आगाज हजरत अमीर खुसरो के कलाम 'पिया घर आए' से किया। इसके बाद डॉ. ऋचा ने 'अच्युतम केशवम' और 'मधुराष्टकम' पर सोलो प्रस्तुति दी, जिसके बाद राग बागेश्वरी पर आधारित सरगम नृत्य की प्रस्तुति हुई।

बात दिल की थी

दिल में दबी रह गई...

'शब्दरंग काव्य संगोष्ठी' में वरिष्ठ शायर अज़्म शाकिरी ने ‘लहू आंखों में आकर जम गया है’, कुंवर रणजीत सिंह ने ‘मुश्किल है खुद के जैसी ही दुनिया तलाशना’, और प्रो. रहमान मुसव्विर ने ‘मेरे कमरे में सिर्फ कागज है’ सुनाकर खूब दाद बटोरी। वहीं 'यूथ मुशायरा' में युवा कलमकारों का जोश देखने लायक था। अखंड प्रताप सिंह ने गीत ‘बात दिल की थी दिल में दबी रह गई’ पेश किया। अंत में साबरी ब्रदर्स ने अपनी कव्वालियों से शाम को अंजाम पर पहुंचाया।