सांस फूले, चक्कर आए, रहे थकान तो तुरंत कराएं जांच

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n NBT न्यूज, लखनऊ

पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) के करीब 70 से 80 फीसदी मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है, जब वे बेहद गंभीर अवस्था यानी WHO फंक्शनल क्लास III या IV में पहुंच चुके होते हैं। लक्षण शुरू होने से लेकर बीमारी की सटीक पहचान होने में औसतन 1.5 से 2 साल की देरी हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांस फूलना , थकान , सीने में दर्द और चक्कर जैसे शुरुआती लक्षणों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर बीमारी की पहचान से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, वरना स्थिति बिगड़ने पर लंग या हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है। यह जानकारी KGMU के पलमोनरी ऐंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने दो दिवसीय 'PH समिट 2026' के अंतिम दिन साझा की।