Pagdi Sambhal Jatta Echo Of The 1907 Farmers Movement That Bowed The British
संघर्ष की आवाज़
नवभारतटाइम्स.कॉम•
साल 1907 में अंग्रेज सरकार ने पंजाब के किसानों पर तीन ऐसे कानून थोप दिए, जिनसे उनकी जमीन और अधिकार खतरे में पड़ गए। इसे किसानों को अपनी जमीन पर पेड़ काटने, घर या झोपड़ी बनाने तक की स्वतंत्रता नहीं थी। इन कानूनों के खिलाफ किसानों में आक्रोश फैल गया। लायलपुर से किसानों ने आंदोलन का बिगुल फूंका। आज यह इलाका पाकिस्तान में है। इस आंदोलन का नेतृत्व सरदार अजीत सिंह ने किया, जो शहीद भगत सिंह के चाचा थे। देखते ही देखते आंदोलन पंजाब से बाहर भी फैल गया। इस आंदोलन को आवाज देने वालों में पत्रकार और कवि बांके दयाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। वह ‘झंग स्याल’ अखबार के संपादक थे। किसानों की सभाओं में वह अपनी जोशीली कविता ‘पगड़ी संभाल जट्टा...’ गाते। कविता किसानों के स्वाभिमान और संघर्ष की आवाज बन गई। सरदार अजीत सिंह के भाषणों और बांके दयाल की कविता ने किसानों में ऐसा जोश भरा कि अंग्रेज सरकार दबाव में आ गई। आखिरकार उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े। ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ का संदेश आज भी किसानों के आत्मसम्मान और अधिकारों की याद दिलाता है।